पाकिस्तान को मिली SCO की कमान, क्या 2027 में इस्लामाबाद जाएंगे PM मोदी?

HIGHLIGHTS
- पाकिस्तान अगले एक साल में SCO से जुड़ी करीब 30 बैठकों की मेजबानी करेगा।
- 2027 में जुलाई से सितंबर के बीच SCO शिखर सम्मेलन होने की संभावना है।
- भारत-पाकिस्तान के मौजूदा तनावपूर्ण रिश्तों के बीच PM मोदी के दौरे पर संशय बना हुआ है।
नई दिल्ली। मंगलवार को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की अगली अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंप दी गई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए बताया कि देश अपनी अध्यक्षता के दौरान “विजन को कार्यरूप देना : कनेक्टिविटी, नवाचार और साझा समृद्धि” थीम के साथ काम करेगा।
एससीओ के तहत आयोजित होने वाली करीब 30 बैठकें अगले एक साल के दौरान पाकिस्तान में आयोजित की जाएंगी। इनमें अधिकारियों, मंत्रियों और राष्ट्राध्यक्षों की बैठकें भी शामिल होंगी।
क्या PM मोदी जाएंगे इस्लामाबाद?
पाकिस्तान को एससीओ की अध्यक्षता मिलने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि भारत इन बैठकों में किस स्तर पर भागीदारी करेगा। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2027 में जुलाई से सितंबर के बीच प्रस्तावित एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए पाकिस्तान जाएंगे?
इसका स्पष्ट जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है। हालांकि, भारत-पाकिस्तान के मौजूदा संबंधों को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी के पाकिस्तान जाने की संभावना फिलहाल काफी कम नजर आती है।
इससे पहले वर्ष 2024 में एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक पाकिस्तान में हुई थी। उस बैठक में शामिल होने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान गए थे।
वर्ष 2023 में एससीओ की अध्यक्षता भारत के पास थी। उस समय भी भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव था। इसके बावजूद पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो एससीओ विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारत के गोवा पहुंचे थे। इसके बाद एससीओ शिखर सम्मेलन ऑनलाइन आयोजित किया गया था, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भी हिस्सा लिया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2015 से अब तक अस्ताना में 2024 में हुए शिखर सम्मेलन को छोड़कर भौतिक रूप से आयोजित लगभग सभी एससीओ शिखर सम्मेलनों में शामिल हुए हैं। वर्ष 2020, 2021 और 2023 में शिखर सम्मेलन वर्चुअल माध्यम से आयोजित किए गए थे।
वर्ष 2025 में चीन के तियानजिन और वर्ष 2022 में उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुए एससीओ शिखर सम्मेलनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक ही मंच पर मौजूद रहे थे। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किसी तरह की औपचारिक या अनौपचारिक बातचीत नहीं हुई थी।
2015 में नवाज शरीफ से हुई थी PM मोदी की मुलाकात
वर्ष 2015 में रूस के ऊफा में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से अलग से मुलाकात की थी। इसके बाद दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच भी बैठकें हुई थीं।
25 दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान का अचानक दौरा भी किया था। इसके बाद वर्ष 2016 में सार्क शिखर सम्मेलन के लिए उनके इस्लामाबाद जाने की चर्चाएं थीं। हालांकि, आतंकवादी हमलों को देखते हुए भारत और कुछ अन्य सदस्य देशों ने सम्मेलन में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसके बाद से सार्क की गतिविधियां लगभग ठप हैं।
दोनों देशों के बीच शांति कायम करने की दिशा में प्रयास हुए थे, लेकिन पठानकोट हमले के बाद आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख और सख्त हो गया।
सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान की नीति के कारण भारत-पाकिस्तान संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। यही वजह है कि एससीओ जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी दोनों देशों के शीर्ष नेता एक-दूसरे से हाथ मिलाने तक से बचते नजर आते हैं।
बड़े स्तर पर आयोजन की तैयारी में पाकिस्तान
कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार एससीओ की अध्यक्षता के दौरान होने वाले कार्यक्रमों को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी कर रही है। अमेरिका के साथ रिश्तों में सुधार और हाल ही में तुर्किये तथा सऊदी अरब के साथ मक्का रक्षा संधि के बाद पाकिस्तान सरकार को उम्मीद है कि एससीओ का सफल आयोजन वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को और मजबूत कर सकता है।
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