अमरोहा: सचिन चौधरी ने जारी किया वीडियो, दानिश अली पर लगाए आरोप

लोकसभा चुनाव के समय से चल रहा गतिरोध अब भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस नेता सचिन चौधरी और पूर्व सांसद दानिश अली के बीच खिंची यह राजनीतिक तनातनी हाल ही में एक तरफा वीडियो और सोशल रील के जरिए तेज हो गई है।
मामले का क्रम
करीब दो महीने पहले गढ़मुक्तेश्वर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दानिश अली ने पत्रकारों के सवाल पर सचिन चौधरी को पहचानने से साफ इंकार कर दिया था और कहा था कि वे उस नाम के व्यक्ति को नहीं जानते तथा क्षेत्र में उनके कोई पदाधिकारी भी नहीं हैं। इस बयान के बाद सचिन चौधरी ने अपना रुख सार्वजनिक किया और कई वीडियो व एक सशक्त रील साझा कर जवाब दिया।
सचिन चौधरी का कहना
सचिन ने लगभग 17 मिनट के वीडियो में खुद को कांग्रेस का सक्रिय कार्यकर्ता और पूर्व पदाधिकारी बताते हुए दानिश अली की ओर से अनदेखी और पार्टी हित के प्रति उपेक्षा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वे ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य रहे हैं और लोक/विधानसभा दोनों चुनावों में हिस्सा ले चुके हैं। सचिन ने आरोप लगाया कि उन पर कुछ मामले दर्ज कराए गए और कहा कि उनकी असल लड़ाई सरकार से है, किसी एक व्यक्ति से नहीं। साथ ही उन्होंने दानिश अली से अपनी भाषा और शैली बदलने की नसीहत दी और स्थानीय संगठन में उनकी स्थिति पर भी सवाल खड़े किए।
सोशल मीडिया रील और सन्दर्भ
सचिन चौधरी ने एक वायरल रील भी अपलोड की है जिसमें परोक्ष रूप से दानिश अली का मज़ाक उड़ाने की कोशिश की गई है — रील में पिटते हुए और सवाल करते अभिनय वाले चेहरों के स्थान पर उनके और दानिश के चेहरे लगाए गए हैं। रील के कैप्शन में भी सीधा संकेत दिया गया है कि यह सचिन चौधरी की तरफ से प्रतिक्रिया है।
दानिश अली की प्रतिक्रिया
पूर्व सांसद ने कहा है कि वीडियो दो महीने पुराना है और उस वक्त पत्रकारों के सवालों का उन्होंने जवाब दिया था। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ फर्जी लोगों की संगठन से निकासी हुई है, इसलिए विरोध हो रहा है। दानिश ने यह भी कहा कि हर किसी का जवाब देना संभव नहीं और उन्होंने सचिन पर ‘चीटर’ होने जैसे आरोपों को नकारा।
क्या बदला?
दोनों पक्षों ने स्थिति स्पष्ट कर दी है—सचिन चौधरी स्थानीय स्तर पर अपनी सक्रियता और पहचान दोहरा रहे हैं, जबकि दानिश अली ने बयान को पुराना बताया और संगठनात्मक कदमों का हवाला दिया। फिलहाल विवाद राजनीतिक बयानबाज़ी और सोशल मीडिया पर जारी है और स्थानीय संगठन के भीतर समापन के संकेत नहीं दिख रहे।
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