जन्माष्टमी व्रत का पारण: रात 12 बजे के बाद ऐसे खोलें उपवास

HIGHLIGHTS
- जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर रखा जाता है।
- कई भक्त रात 12 बजे के बाद व्रत खोलते हैं।
- कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं।
नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के तौर पर मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के प्रति आस्था रखते हुए व्रत करते हैं। पूरे दिन उपवास रखने के बाद रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें भोग अर्पित किया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।
जन्माष्टमी के व्रत का पारण विशेष माना जाता है और यह सामान्य व्रतों के पारण से अलग होता है। इस व्रत में उसी दिन उपवास खोल लिया जाता है। साथ ही पारण के दौरान अन्न ग्रहण करना भी जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं जन्माष्टमी के व्रत का पारण किस तरह किया जाता है और व्रत खोलते समय क्या खाना चाहिए।
रात 12 बजे के बाद किया जाता है पारण
मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की रात करीब 12 बजे भगवान के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान लड्डू गोपाल का अभिषेक किया जाता है, पूजा और आरती होती है तथा भगवान को भोग अर्पित किया जाता है।
कई श्रद्धालु भगवान के जन्म और पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके उसी समय व्रत खोल लेते हैं। यानी रात 12 बजे के बाद जन्माष्टमी के व्रत का पारण किया जा सकता है। वहीं, कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करते हैं।
सबसे पहले ग्रहण करें भगवान का प्रसाद
व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया गया प्रसाद लेना शुभ माना जाता है। पारण की शुरुआत चरणामृत, माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी या ताजे फल से की जा सकती है। पहले चरणामृत ग्रहण करें और उसके बाद थोड़ा प्रसाद लेकर व्रत खोलें।
जन्माष्टमी की रात में ही क्यों खोला जाता है व्रत?
जन्माष्टमी में मध्यरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी समय हुआ था। इसलिए भक्त रात 12 बजे भगवान का जन्मोत्सव मनाते हैं।
भगवान के जन्म के बाद बाल कृष्ण का अभिषेक किया जाता है। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और माखन-मिश्री, पंजीरी, फल आदि का भोग लगाया जाता है। इसके बाद कई स्थानों पर श्रद्धालु भगवान का प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करते हैं।
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