बसपा ने बूथ-सेक्टर संगठन को फिर से मजबूत करने का लिया फैसला

लखनऊ। विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी संगठन को बूथ और सेक्टर स्तर तक फिर से मजबूत करने का निर्णय लिया है। इसके तहत विधानसभा अध्यक्ष, महासचिव और प्रभारी अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे जल्द से जल्द हर बूथ और सेक्टर का संगठन तैयार करें।
पार्टी के नए संगठन में 50 प्रतिशत युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, बसपा प्रमुख ने दो-दो जिला प्रभारियों के पद समाप्त कर उन्हें विधानसभा प्रभारी बना दिया है।
निर्वाचन आयोग के नए दिशानिर्देशों के तहत 1,500 मतदाताओं के बजाय अब प्रत्येक बूथ पर 1,200 मतदाता होंगे। इससे प्रदेश में बूथों की संख्या 1.62 लाख से बढ़कर 1.77 लाख हो गई है। इसके कारण पुराने बूथ-सेक्टर संगठन पूरी तरह प्रभावी नहीं हैं और करीब 15 हजार नए बूथों पर संगठन की स्थिति अभी सुदृढ़ नहीं है।
शनिवार को आयोजित पदाधिकारियों की बैठक में मायावती ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक विधानसभा के सभी सेक्टरों (35-40 सेक्टर) को दो हिस्सों में बांटकर प्रतिदिन कम से कम चार बूथ गठित किए जाएं। चूंकि हर सेक्टर में औसतन 10 बूथ हैं, इसलिए पूरे राज्य में बूथ और सेक्टर का गठन लगभग तीन माह में पूरा होने की संभावना है। जिलाध्यक्षों और मंडल प्रभारियों को इस प्रक्रिया की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
बसपा प्रमुख ने पार्टी कोष्ठक में यह भी कहा कि 15 मार्च को पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती लखनऊ और नोएडा में धूमधाम से मनाई जाएगी। इसी तरह, 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के आयोजन की भी तैयारी की जाएगी। इसके लिए 12 मंडलों के पदाधिकारी-कार्यकर्ता लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह मंडलों के पदाधिकारी नोएडा स्मारक पर उपस्थित होंगे।
बूथ और सेक्टर गठन पूरा होने के बाद बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद, राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, विधायक उमा शंकर सिंह और मंडल स्तरीय मुस्लिम भाईचारा प्रभारी जिलों का दौरा करेंगे।
मायावती ने बैठक में यह भी कहा कि अगले वर्ष पार्टी की सरकार बनाने के लिए प्रत्येक जिले में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गौरतलब है कि 2007 में बसपा ने अकेले दम पर बहुमत की सरकार बनाई थी। हालांकि, पिछले दो दशकों में पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ है और वर्तमान में बसपा केवल एक विधायक तक सीमित है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका था।
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