बसपा में परिवार को लेकर मायावती के फैसले पर सियासत तेज, आकाश आनंद के लिए चंद्रशेखर ने खोले दरवाजे

HIGHLIGHTS
- मायावती ने आनंद कुमार के बेटों को पार्टी में पद नहीं देने की बात कही।
- दीपिका आनंद फिलहाल लंदन में कानून की पढ़ाई कर रही हैं।
- चंद्रशेखर ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में आने का खुला न्योता दिया।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि अब उनके भाई आनंद कुमार के बेटे नहीं, बल्कि उनकी बेटी दीपिका आनंद बसपा के मिशन को आगे बढ़ाएंगी। उन्होंने साफ किया कि आनंद कुमार के बेटों को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
मायावती ने कहा कि उनके लिए बसपा का मिशन सबसे ऊपर है। इसी वजह से अब उनके भाई आनंद कुमार के बेटे नहीं, बल्कि कानून की पढ़ाई कर रहीं उनकी बेटी दीपिका आनंद पार्टी के लिए काम करेंगी। जरूरत पड़ने पर आनंद कुमार अपनी जिम्मेदारियां उन्हें सौंप सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर दीपिका इसके लिए तैयार नहीं होती हैं तो आम सहमति से पार्टी के दलित वर्ग के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। मायावती ने स्पष्ट किया कि वह अपने किसी भी बेटे को जिम्मेदारी नहीं देंगी और न ही उनके बच्चे बड़े होने पर उन्हें पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
मायावती ने कहा कि यही मौजूदा समय की जरूरत और पार्टी के हित में है। उन्होंने इसे अपना अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा बताते हुए कहा कि आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में छोटे या बड़े किसी भी पद पर राजनीति करने का अवसर नहीं दिया जाएगा।
आकाश आनंद के लिए हमेशा खुले हैं पार्टी के दरवाजे: चंद्रशेखर
मायावती द्वारा अपने भतीजे आकाश आनंद को बसपा से निकाले जाने के सवाल पर आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि आकाश आनंद उनकी पार्टी में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले हैं और दोनों मिलकर बाबा साहब के मिशन को पूरा करेंगे।
चंद्रशेखर शनिवार को ईको गार्डन में पंचायत सहायकों के धरना-प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे।
ईशान आनंद को भी पार्टी से किया गया बाहर
बसपा में मायावती के छोटे भतीजे ईशान आनंद छह दिन भी नहीं टिक पाए। उन्हें बीते सोमवार को 19 राज्यों का मुख्य प्रभारी बनाया गया था। आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद मायावती ने ईशान आनंद के लिए भी पार्टी के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए।
हालांकि, मायावती का अपने भाई आनंद कुमार पर भरोसा कायम है। इसी के चलते दीपिका आनंद के जरिए परिवार के लिए एक रास्ता खुला रखा गया है। अब बसपा की कमान 'बहिन जी' मायावती के नेतृत्व में 'छोटी बहन जी' दीपिका संभालेंगी।
लंदन में कानून की पढ़ाई कर रही हैं दीपिका
दीपिका आनंद लंदन में कानून की शिक्षा ले रही हैं। आकाश आनंद और ईशान आनंद भी लंदन में पढ़ाई कर चुके हैं।
मायावती के इन फैसलों के राजनीतिक मायने भी तलाशे जाने लगे हैं। बसपा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों के मुहाने पर है। ऐसे में इन फैसलों का दलित वोट बैंक की राजनीति पर असर आने वाले समय में दिखाई दे सकता है।
फिलहाल मायावती ने पार्टी के भविष्य को लेकर सख्त फैसले लिए हैं। उनकी यह छवि उनके प्रति सहानुभूति का कारण भी बन सकती है।
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