‘चढ़ावा चोर कहां मिलेंगे...’, हरियाणा विधानसभा के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन, पुलिस ने किया बल प्रयोग
By Hitesh — August 27, 2026

HIGHLIGHTS
- मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों ने प्रदर्शन किया।
- विधायकों ने काले कपड़े पहनकर विधानसभा तक मार्च किया।
- पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की।
Author: — Dainik Dehat
चंडीगढ़। ‘चढ़ावा चोर कहां मिलेंगे, बीजेपी के दफ्तर में’ जैसे नारे लगाते हुए कांग्रेस विधायकों ने गुरुवार को विधानसभा तक मार्च किया। मानसून सत्र के पहले दिन विधायक काले कपड़े पहनकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी और नीट आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर विद्यार्थियों के साथ हुई बर्बरता के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने विधायकों को रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग की और बल प्रयोग किया। इस दौरान कई विधायकों के चोटिल होने की बात कही गई।
इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि चाहे जंतर-मंतर हो या विधानसभा मार्च, देश के हर नागरिक और जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। उनके साथ किसी भी तरह का बल प्रयोग संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पुलिस उन्हें और विधायकों को धक्के मार रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे सरकार ने पुलिस की वर्दी में गुंडे भेज रखे हों।
भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि नीट पेपर लीक और चढ़ावा चोरी दोनों ऐसे मुद्दे हैं, जिनसे बीजेपी सरकार लगातार आंखें चुराती रही है। लेकिन जब विपक्ष ने आवाज उठाई और जनता आंदोलन पर उतरी तो सरकार ने जांच और कार्रवाई की खानापूर्ति की।
उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कोई भी दोषी नहीं बचना चाहिए। उनके मुताबिक यह मामला भगवान राम के प्रति आस्था रखने वाले लोगों को परेशान करने वाला है।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि सरकार को बताना चाहिए कि जांच शुरू करने में देरी क्यों हुई। आरोप जून 2026 की शुरुआत में सार्वजनिक हुए, 13 जून को एसआईटी गठित हुई, 23 जून को प्रारंभिक रिपोर्ट आई और 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने सवाल किया कि आरोप सामने आने के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई और क्या इससे सबूत नष्ट होने या प्रभावित होने का जोखिम था।
उन्होंने कहा कि एसआईटी ने पाया कि गिनती प्रक्रिया में सुरक्षा गार्ड, फ्रिस्किंग, पॉकेट रहित कपड़े और 180 दिन की सीसीटीवी फुटेज जैसी अनिवार्य एसओपी का पालन नहीं हुआ। सीसीटीवी फुटेज सिर्फ 45 दिनों तक रखी गई।
हुड्डा ने सवाल किया कि ये व्यवस्थाएं क्यों विफल रहीं और जिम्मेदार अधिकारियों या ट्रस्ट प्रबंधन पर प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने यह भी पूछा कि बड़े नामों को क्लीन चिट कैसे मिली। क्या केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त है? क्या निचले स्तर के कर्मचारी इतनी हाईटेक और कई लेयर वाली सुरक्षा के बीच करोड़ों की चोरी कर सकते हैं?
हुड्डा ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट का किया जिक्र
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जंतर-मंतर लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने जिस तरह पैलेट गन से घायल हुए बच्चे की एफआईआर तक लिखने से इनकार कर दिया था, उससे सरकार की क्रूर मंशा स्पष्ट हो गई थी।
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसका विरोध किया और थाने में धरना दिया, तब सरकार ने मजबूरी में एफआईआर दर्ज की। हुड्डा के मुताबिक राहुल गांधी के दृढ़ संकल्प ने दिखाया कि सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसी तरह हरियाणा कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी और बीजेपी की जवाबदेही तय करेगी।
भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा युवाओं और छात्रों के संघर्ष की जीत है। अगर प्रधान ने शुरुआत में ही नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया होता तो मासूम छात्रों को न लाठीचार्ज का सामना करना पड़ता और न ही इतना संघर्ष करना पड़ता।
उन्होंने कहा कि अब सरकार को उन बच्चों से माफी मांगनी चाहिए, जिन पर लाठीचार्ज करवाया गया था। लाठीचार्ज करने वालों और छात्रों पर पैलेट गन चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी केस वापस लिए जाने चाहिए।
भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि पेपर लीक की समस्या देश में महामारी का रूप ले चुकी है। युवाओं को बीजेपी सरकार की अनदेखी के कारण सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ा। इसके खिलाफ कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया। उन्होंने कहा कि आखिरकार जनआंदोलन के सामने बीजेपी को झुकना पड़ा।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार में लगातार हो रहे पेपर लीक के कारण अब तक 7.50 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हो चुके हैं। यह समस्या केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में भी लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी की स्थिति यह है कि हर साल केवल 6 लाख नौकरियों के लिए 9 करोड़ युवा आवेदन करते हैं।
पेपर लीक का गढ़ बना हरियाणा: हुड्डा
हुड्डा ने कहा कि हरियाणा पेपर लीक का गढ़ बन चुका है। उनके अनुसार, हरियाणा में 30 से ज्यादा पेपर लीक हो चुके हैं। इनमें HCS (2023), CET (2023), SI भर्ती (मार्च 2022), डेंटल सर्जन (दिसंबर 2021), PGI रोहतक परीक्षा (2025), पुलिस कांस्टेबल भर्ती (अगस्त 2021), ग्राम सचिव भर्ती (12 जनवरी 2021), क्लर्क भर्ती (दिसंबर 2016), बिजली विभाग क्लर्क भर्ती, एक्साइज इंस्पेक्टर (दिसंबर 2016), एग्रीकल्चर इंस्पेक्टर (जुलाई 2017), कंडक्टर भर्ती (सितंबर 2017), ITI इंस्ट्रक्टर भर्ती, आबकारी इंस्पेक्टर, नायब तहसीलदार भर्ती, PTI भर्ती, HTET (नवंबर 2015), केंद्रीय विद्यालय संगठन प्राइमरी टीचर (अक्टूबर 2015), असिस्टेंट प्रोफेसर कॉलेज भर्ती घोटाला (फरवरी 2017), B-फार्मेसी पेपर लीक घोटाला (जुलाई 2017), HBSE बोर्ड 10वीं-12वीं पेपर लीक (2025) और HTET 2026 शामिल हैं। HTET 2026 में बिना सील के पेपर बांटे जाने और लीक की आशंका जताई गई थी।
उन्होंने कहा कि पूरे देश में 152 से ज्यादा पेपर लीक हो चुके हैं। उनके मुताबिक, हरियाणा समेत पूरे देश में पेपर और नौकरियों का सौदा करने वाला एक पूरा रैकेट सक्रिय है। उन्होंने कहा कि यह समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि जानलेवा साबित हो रही है। सिर्फ NEET पेपर लीक से परेशान होकर देशभर में 26 अभ्यर्थी आत्महत्या कर चुके हैं।
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