चिन्मय कृष्ण दास को चार मामलों में जमानत, फिर भी जेल से बाहर आना मुश्किल

HIGHLIGHTS
- हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने रविवार को जमानत का फैसला सुनाया।
- दोनों मामलों का संबंध तोड़फोड़ और पुलिस के काम में बाधा डालने से है।
- वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने चार मामलों में जमानत मिलने की जानकारी दी।
बांग्लादेश हाईकोर्ट ने रविवार को जेल में बंद हिंदू अधिकार नेता चिन्मय कृष्ण दास को दो और मामलों में जमानत दे दी। ये दोनों मामले तोड़फोड़ और पुलिस के काम में बाधा डालने से संबंधित हैं। हाईकोर्ट की जस्टिस केएम जाहिद सरवार और जस्टिस शेख अबू ताहेर की पीठ ने यह फैसला सुनाया। इससे चिन्मय को कानूनी राहत मिली है, लेकिन फिलहाल उनकी तत्काल रिहाई का रास्ता साफ नहीं हुआ है।
छह मामलों में अब तक क्या हुआ?
चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनके वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य के अनुसार, अब उन्हें चार मामलों में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। इससे पहले पिछले महीने भी उन्हें दो मामलों में जमानत दी गई थी। ये मामले तोड़फोड़, हमले और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़े थे। रविवार को दो और मामलों में जमानत मिलने के बाद चार मामलों में उन्हें राहत मिल गई है।
फिर चिन्मय कृष्ण दास जेल से बाहर क्यों नहीं आ सकते?
चिन्मय के खिलाफ अभी अन्य मामले लंबित हैं। राजद्रोह के मामले में उनकी जमानत पर फिलहाल रोक लगी हुई है। इसके अलावा सरकारी वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या से संबंधित मामला भी चल रहा है। इस मामले की सुनवाई चटगांव स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल में हो रही है। ऐसे में चार मामलों में जमानत मिलने के बावजूद उनकी तुरंत रिहाई नहीं हो पाएगी।
चिन्मय की गिरफ्तारी कब और किस आरोप में हुई थी?
चिन्मय कृष्ण दास को नवंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का कथित रूप से अपमान करने का आरोप लगाया गया था। इसी आरोप के आधार पर उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ था।
उनकी गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन हुए और सांप्रदायिक तनाव भी बढ़ा। इसके बाद उनके खिलाफ कई अन्य मामले भी दर्ज किए गए। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश और तोड़फोड़ जैसे आरोप शामिल हैं।
हत्या का मामला किस घटना से जुड़ा है?
हत्या का मामला चटगांव में हुई एक घटना से जुड़ा है, जिसमें सरकारी अभियोजक सैफुल इस्लाम अलीफ की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। यह घटना उन कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान हुई थी, जो चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे।
इसी मामले की सुनवाई फिलहाल चटगांव स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल में चल रही है। वहीं, चिन्मय के खिलाफ राजद्रोह के मामले में मिली जमानत पर रोक अभी भी बरकरार है।
भारत ने चिन्मय की गिरफ्तारी पर क्या कहा था?
चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के समय भारत ने इस पर गहरी चिंता जताई थी। भारत ने ढाका से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया था, जब भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में तनाव बढ़ रहा था। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली में शरण ली थी। इसी अवधि में दोनों देशों के रिश्तों में ठंडापन आया।
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