बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ा, सोन नदी में छोड़ा जा रहा पानी; प्रशासन अलर्ट

HIGHLIGHTS
- नेपाल में प्राकृतिक आपदा और लगातार बारिश का असर बिहार की नदियों पर पड़ा है।
- गंडक, गंगा, सोन, फल्गु, मोरहर और निरंजना के जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- बाणसागर बांध के छह खुले रेडियल गेटों में से चार बंद किए गए हैं।
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा और लगातार हो रही बारिश का असर बिहार की कई नदियों पर दिखाई दे रहा है। गंडक, गंगा, सोन, फल्गु, मोरहर और निरंजना नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच अब प्रशासन सोन नदी को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है। बाणसागर बांध और इंद्रपुरी बराज से पानी छोड़े जाने के बाद नदी किनारे रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।
बाणसागर से सोन नदी में छोड़ा जा रहा पानी, निगरानी बढ़ी
झारखंड और मध्य प्रदेश के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश का असर मगध समेत बिहार के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। सोन नदी में जल प्रवाह बढ़ने के बाद नदी किनारे बसे इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
रीवा स्थित बाणसागर मुख्य बांध में जलस्तर को नियंत्रित रखने के लिए रविवार को जल प्रबंधन में बदलाव किया गया। बांध के खुले छह रेडियल गेटों में से चार को बंद कर दिया गया। वहीं, गेट संख्या 9 और 10 की ओपनिंग को एक मीटर से घटाकर 0.25 मीटर कर दिया गया।
दो गेटों से 105 क्यूमेक्स पानी का डिस्चार्ज
बाणसागर बांध के स्पिलवे से फिलहाल दो रेडियल गेटों के जरिए 105 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं, स्पिलवे और पावर हाउस-3 से सोन नदी में छोड़े जा रहे पानी का कुल प्रवाह 279.59 क्यूमेक्स दर्ज किया गया है।
जल संसाधन विभाग ने सोन नदी के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि वे नदी के नजदीक न जाएं और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
इंद्रपुरी बराज के 52 गेट खुले, करीब दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा
बिहार के रोहतास जिले में स्थित इंद्रपुरी सोन बराज की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। रविवार दोपहर तीन बजे तक बराज के कुल 69 गेटों में से 52 गेट खुले हुए थे। बराज का अपस्ट्रीम जलस्तर 355 फीट दर्ज किया गया है।
इंद्रपुरी बराज से डाउनस्ट्रीम की ओर 1,96,149 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि अपस्ट्रीम डिस्चार्ज 2,03,382 क्यूसेक दर्ज किया गया। हालांकि, फिलहाल जलस्तर का रुझान गिरावट की ओर बताया गया है।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन अलर्ट
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद बिहार के सीमावर्ती और नदी किनारे वाले जिलों में प्रशासन पहले से ही सतर्क है। कई स्थानों पर निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति बनी हुई है।
सोन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन, जल संसाधन विभाग और मैदानी अमले को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
नदी किनारे बसे गांवों में सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
लोगों से अपील की गई है कि वे स्नान करने, मछली पकड़ने या किसी अन्य काम के लिए नदी के पास जाने से बचें। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में अचानक खतरा बढ़ सकता है। सोन नदी किनारे बसे गांवों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन लगातार अपडेट ले रहा है।
सारण में बाढ़ से 2.33 लाख लोग प्रभावित
सारण जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। जिले के 7 प्रखंडों की 35 पंचायतों के 109 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन अब तक 1206 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा चुका है।
155 नावों से जारी है राहत अभियान
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से 155 नावों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा एसडीआरएफ की 6 राफ्ट टीम और एनडीआरएफ की एक यूनिट भी तैनात की गई है।
डोरीगंज में जलस्तर राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचने के बाद प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
मेडिकल टीम और भोजन की व्यवस्था
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले में 21 चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में अब तक 1371 लोगों का इलाज किया जा चुका है। छह बोट एंबुलेंस भी लगातार सेवा दे रही हैं।
प्रशासन की ओर से अब तक 8945 ड्राई राशन और फूड पैकेट के साथ 11349 पॉलीथिन शीट वितरित की गई हैं।
15 सामुदायिक रसोई केंद्रों में मिल रहा भोजन
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले में 15 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के जरिए अब तक 12 हजार से अधिक लोगों को भोजन कराया गया है। जरूरत के अनुसार सामुदायिक रसोई केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
डीएम वैभव श्रीवास्तव ने खुद संभाला मोर्चा
बिहार के कई जिलों में आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। सारण के डीएम वैभव श्रीवास्तव खुद मोर्चा संभाले हुए हैं।
डीएम मोटरबोट और नाव के जरिए ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं और फंसे नागरिकों का रेस्क्यू कर रहे हैं। संवेदनशील और निचले इलाकों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं, जो लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।
इसके साथ ही प्रभावित परिवारों के बीच फूड पैकेट, मेडिकल किट, पॉलीथिन शीट और पेयजल का वितरण तेजी से किया जा रहा है।
तटबंधों की मरम्मत का काम जारी
दिघवारा के त्रिलोकचक और दरियापुर के सिमरिया में तटबंध में आई दरार को भरने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। वहीं, पशुओं के लिए 8 शिविर बनाए गए हैं, जहां 678 पशुओं के लिए चारा और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
मंत्री और अधिकारियों ने लिया स्थिति का जायजा
उप मुख्यमंत्री सह सारण जिले के प्रभारी मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और एसएसपी रौशन कुमार ने उन्हें राहत शिविरों, मेडिकल टीम, नाव और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी दी।
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें, अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी परेशानी की स्थिति में प्रशासन की ओर से बनाए गए सुरक्षित स्थानों का सहारा लें।
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