गरबा में मुस्लिमों की एंट्री रोकने पर विवाद, संजय राउत बोले- मोहन भागवत से पूछिए

HIGHLIGHTS
- इस साल नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्तूबर से होगी।
- वीएचपी ने गरबा-डांडिया आयोजकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
- प्रतिभागियों की पहचान जांचने और आधार कार्ड देखने का सुझाव दिया गया है।
महाराष्ट्र में अगले महीने होने वाले नवरात्रि उत्सव से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर विवाद बढ़ गया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने मुसलमानों को गरबा और डांडिया कार्यक्रमों से दूर रखने की बात कही है। संगठन की ओर से आयोजकों के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। इनमें कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की पहचान जांचने और आधार कार्ड देखने जैसी बातें कही गई हैं। इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्तूबर से होगी।
वीएचपी ने आयोजकों को क्या निर्देश दिए?
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा कि संगठन ने नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा-डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भागीदारी नहीं होने देने का फैसला किया है। उनका कहना है कि नवरात्रि देवी की पूजा का पर्व है और इसमें धार्मिक मान्यताओं से जुड़े नियमों का पालन किया जाना चाहिए। वीएचपी ने इसे किसी समुदाय के खिलाफ कदम न बताते हुए हिंदू त्योहारों के सांस्कृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय बताया है। संगठन ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की पहचान जांचने और माथे पर तिलक लगाने का सुझाव भी दिया है।
संजय राउत ने मोहन भागवत का जिक्र क्यों किया?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने वीएचपी के इस रुख पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी और सांस्कृतिक संघर्ष में मुसलमानों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राउत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया विदेश दौरे के दौरान हिंदू-मुस्लिम संबंधों को लेकर दिए गए बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि एक तरफ इस तरह की बातें कही जाती हैं और दूसरी ओर उनके संगठन से जुड़े लोग ऐसे नियम बना रहे हैं। राउत ने कहा कि मोहन भागवत को इस मुद्दे पर बयान देना चाहिए।
वीएचपी ने भागवत के बयान पर क्या कहा?
मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। उन्होंने सभी इंसानों की गरिमा और सभी रास्तों के एक ही लक्ष्य तक पहुंचने की बात भी कही थी। वीएचपी के श्रीराज नायर से जब उनके बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि संगठन इस पर टिप्पणी नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने सवाल किया कि जिन लोगों की धार्मिक मान्यताएं नवरात्रि की पूजा पद्धति से अलग हैं, उनके लिए वीएचपी अपने दिशा-निर्देशों में बदलाव क्यों करे।
विपक्ष ने वीएचपी के दिशा-निर्देशों पर क्या कहा?
- कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने वीएचपी के कदम को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि त्योहार सामाजिक मेल-जोल और सांप्रदायिक सद्भाव के अवसर होते हैं।
- उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी सद्भावना के तहत गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता है। वहीं, ईद और रमजान के अवसरों पर दूसरे समुदायों के लोगों को भी बुलाया जाता है।
- एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने भी इन दिशा-निर्देशों की आलोचना की। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार से सवाल किया कि क्या वह वीएचपी को कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में निर्देश देने की अनुमति देगी।
अल्पसंख्यक आयोग ने क्या कहा?
महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म का त्योहार मनाने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक आयोजनों में मुसलमानों को सामूहिक रूप से बाहर करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कई संगठन मुसलमानों को भी ऐसे कार्यक्रमों में आमंत्रित करते हैं और त्योहार लोगों को जोड़ने का काम करते हैं, बांटने का नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को कार्यक्रम में बुलाना या नहीं बुलाना आयोजक की इच्छा हो सकती है, लेकिन कोई व्यक्ति बिना बुलाए जबरन ऐसे कार्यक्रम में शामिल नहीं होता। इस पूरे विवाद के बाद महाराष्ट्र में धार्मिक आयोजनों में भागीदारी, पहचान की जांच और सामाजिक सद्भाव को लेकर बहस तेज हो गई है।
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