जयंत चौधरी ने अखिलेश का नाम लिए बिना साधा निशाना, बोले- अब शांत रहने का वक्त नहीं

HIGHLIGHTS
- ‘चवन्नी’ विवाद को लेकर जयंत चौधरी ने कहा कि कोई उनका अपमान नहीं कर सकता।
- जयंत ने कहा कि इस विवाद को उनकी जाति तक ले जाना सबसे गलत बात रही।
- उन्होंने कहा कि अब शांत रहने का वक्त नहीं है और कुछ बातें बर्दाश्त से बाहर होती हैं।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच शुरू हुई ‘चवन्नी’ को लेकर सियासी बयानबाजी अब ‘एबीसीडी’ तक पहुंच गई है। सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के बयान के बाद रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने रविवार को लखनऊ में अखिलेश यादव का नाम लिए बिना पलटवार किया। उनके बयान से दोनों दलों के बीच पहले से चली आ रही तल्खी एक बार फिर सामने आ गई।
रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के भरे हुए सभागार में सम्मेलन के आयोजक और पार्टी में शामिल हुए स्नातक एवं शिक्षक राजनीति से जुड़े नेता बीके शुक्ला का स्वागत करते हुए जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि हमने उन्हें सिखाया है, लेकिन उन्हें चौधरी साहब ने सिखाया है। उन्होंने कहा कि अब चुप रहने का समय नहीं है और कुछ बातें बर्दाश्त से बाहर होती हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में चौधरी चरण सिंह का समाज इसका जवाब देगा और इसके लिए अकेले जयंत चौधरी को जवाब देने की जरूरत नहीं होगी।
जयंत चौधरी ने कहा कि उनके बारे में राजनीति की एबीसीडी नहीं जानने जैसी बातें कही जा रही हैं। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने उन्हें एबीसीडी का अर्थ अहंकार, भ्रष्टाचार, चोरी और धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सम्मान, संघर्ष और समाज को साथ लेकर चलना सिखाया है।
अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान पर जयंत ने कहा कि वह अपना सम्मान अपने साथ लेकर चलते हैं, इसलिए कोई उनका अपमान नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे गलत बात यह रही कि बात केवल उनके तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी जाति तक पहुंचा दी गई।
जयंत ने कहा कि जब उनका नाम लेकर बात नहीं की गई तो उन्होंने भी नाम लेकर जवाब नहीं दिया। हालांकि, सपा के जिम्मेदार नेताओं की ओर से दिए जा रहे बयानों से यह जरूर सामने आ रहा है कि जिस सहयोगी को अपने साथ रखा गया, उसके बारे में उनके मन में कितने तुच्छ विचार थे।
पहले से साथ रहे लोगों को कितना सम्मान मिला, जनता देखेगी
पूर्वांचल को लेकर अखिलेश यादव के दोहे पर भी जयंत चौधरी ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अपने परंपरागत वोट बैंक के अलावा नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए इस तरह के राजनीतिक संदेश दिए जा रहे हैं। लेकिन इससे पहले यह देखना जरूरी है कि जो लोग पहले से साथ जुड़े थे, उन्हें कितना सम्मान दिया गया और उन्हें कितना अपने साथ रखा गया। इसका फैसला जनता करेगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह की हल्की टिप्पणियों के जरिए सपा के जिम्मेदार लोग यह बता रहे हैं कि जिस सहयोगी को साथ रखा गया, उसके बारे में उनके मन में क्या विचार थे।
‘पीडीए नहीं, पीड़ा और बौखलाहट’
जयंत चौधरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आज हर घटना को जाति के नजरिए से देखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे पीडीए नहीं बल्कि पीड़ा और बौखलाहट बताया। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह जातीय ध्रुवीकरण के सख्त विरोधी थे।
उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह के नाम पर कई लोगों ने राजनीतिक दल बनाए, झंडों के रंग बदले और चुनाव के समय उनका नाम लिया, जबकि चुनाव के बाद उन्हें भुला दिया गया। जयंत ने कहा कि उन्हें इससे आपत्ति नहीं है, लेकिन चौधरी साहब की तस्वीर लगाना आसान है और उनके बताए रास्ते पर चलना बहुत मुश्किल है।
स्कूलों के मुद्दे पर भी सपा को घेरा
शिक्षा के मुद्दे पर जयंत चौधरी ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आज जो लोग स्कूल खुलवाने की बात कर रहे हैं, उनके कार्यकाल में स्कूलों में खुलेआम नकल होती थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में प्राथमिक विद्यालयों का बजट काफी कम था और कई स्कूलों के बंद होने की स्थिति बनी हुई थी। उनके मुताबिक, जिन स्कूलों को दोबारा खोलने का काम हुआ, अब उसी पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
जयंत ने कहा कि शिक्षा की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। समाज, अभिभावकों और शिक्षकों को मिलकर अगली पीढ़ी के भविष्य की चिंता करनी होगी।
डिफेंस कॉरिडोर को रोजगार से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट में काम चल रहा है। इससे आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि आईटीआई, पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थानों से निकलने वाले युवाओं का कौशल उद्योगों की जरूरत के मुताबिक होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तीन साल में 300 ब्रह्मोस मिसाइलों के निर्माण की दिशा में काम किया जाएगा। डिफेंस सेक्टर में रोजगार के लिए कौशल विकास को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठक में चर्चा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आईटीआई के नवीनीकरण की दिशा में पहली बार बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।
‘अब शांत रहने का वक्त नहीं’
सम्मेलन के अंत में जयंत चौधरी ने संकेत दिया कि रालोद अब सपा की ओर से किए जाने वाले राजनीतिक हमलों को चुपचाप सहने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा कि सामने वाला हर तरह के हथकंडे अपना रहा है, छोटी-छोटी बातों को जातीय नजरिए से देखा जा रहा है और कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रालोद की राजनीति सभी को साथ लेकर चलने की है। सम्मेलन में कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, राष्ट्रीय महासचिव ध्रुव त्यागी, अनिल दुबे, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष ऐश्वर्या राज सिंह, अनुपम मिश्रा और संयोजक मयंक त्रिवेदी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
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