यूपी में बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ा भार का बोझ, लोड घटाने के लिए लगाने पड़ रहे चक्कर

HIGHLIGHTS
- यूपी में लाखों बिजली उपभोक्ताओं का भार बढ़ाए जाने पर विवाद, उपभोक्ताओं ने बिना सूचना लोड बढ़ाने का आरोप लगाया।
- करीब 47 लाख कनेक्शनों का बढ़ा बिजली भार, जिससे फिक्स चार्ज, एमडी पेनाल्टी और सिक्योरिटी राशि बढ़ने की चिंता।
- उपभोक्ता भार घटाने की प्रक्रिया आसान करने की मांग कर रहे हैं, जबकि विभाग ने संसाधनों की जरूरत के आधार पर लोड बढ़ाने की बात कही।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की शिकायत है कि उनका बिजली कनेक्शन भार (लोड) स्वत: बढ़ा दिया जा रहा है, लेकिन इसे कम कराने के लिए उन्हें बिजली उपकेंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभाग भार बढ़ाने में तेजी दिखाता है, लेकिन कम करने की प्रक्रिया आसान नहीं है।
प्रदेश में करीब 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। नियमों के अनुसार, साल में तीन महीनों की अधिकतम बिजली खपत के आधार पर कनेक्शन का भार निर्धारित किया जाता है। हालांकि, कई उपभोक्ताओं का कहना है कि भार बढ़ाने से पहले उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जाती और इसकी जानकारी उन्हें बढ़े हुए बिल के बाद मिलती है।
भार घटाने की प्रक्रिया बनी परेशानी
उपभोक्ताओं का कहना है कि मौसम बदलने के साथ बिजली की खपत कम होने पर भार अपने आप कम नहीं किया जाता। इसके लिए आवेदन देना पड़ता है, दस्तावेज और अन्य प्रमाण देने होते हैं। कई बार जांच और मीटर रीडर की रिपोर्ट के बाद ही भार कम हो पाता है।
इस पूरी प्रक्रिया में उपभोक्ताओं को समय और पैसा दोनों खर्च करना पड़ता है।
फिक्स चार्ज और जुर्माने का बढ़ता बोझ
मान लीजिए किसी उपभोक्ता का कनेक्शन दो किलोवाट का है और अप्रैल, मई व जून में उसकी अधिकतम खपत के आधार पर लोड 2.7 किलोवाट तय हो जाता है। ऐसे में उससे तीन किलोवाट के हिसाब से फिक्स चार्ज वसूला जा सकता है।
इसके अलावा अधिकतम मांग (एमडी) पेनाल्टी और सिक्योरिटी राशि में भी बढ़ोतरी हो जाती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि भार कम होने पर भी पूरी राशि वापस नहीं घटाई जाती।
47 लाख उपभोक्ताओं का बढ़ाया गया भार
हाल ही में प्रदेश के करीब 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं का भार बढ़ाए जाने के बाद विवाद और तेज हो गया है। इनमें स्मार्ट मीटर और सामान्य मीटर दोनों तरह के उपभोक्ता शामिल हैं।
उपभोक्ताओं की मांग है कि जिस तरह सिस्टम के जरिए बिजली भार अपने आप बढ़ाया गया है, उसी तरह खपत कम होने पर इसे स्वत: घटाने की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
बिजली विभाग ने बताई वजह
पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा ने कहा कि बिजली भार बढ़ाने का उद्देश्य संसाधनों की सही योजना बनाना है। उन्होंने बताया कि किसी क्षेत्र में लोड बढ़ने पर ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरणों पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए जरूरत के अनुसार क्षमता बढ़ाई जाती है।
उन्होंने कहा कि भार कम कराने के लिए उपभोक्ता आवेदन करते हैं तो जांच के बाद सही पाए जाने पर इसे घटाया जाता है। साथ ही सिक्योरिटी राशि पर ब्याज का प्रावधान भी है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनियां भार बढ़ाने के मामले में पारदर्शिता नहीं बरत रही हैं। उन्होंने कहा कि भार बढ़ाने से पहले उपभोक्ताओं को जानकारी दी जानी चाहिए और सॉफ्टवेयर में ऐसा प्रावधान होना चाहिए जिससे खपत कम होने पर भार भी स्वत: कम हो सके।
फिक्स चार्ज कितना है?
- शहरी क्षेत्र में: 1 किलोवाट पर 110 रुपये फिक्स चार्ज
- ग्रामीण क्षेत्र में: 1 किलोवाट पर 90 रुपये फिक्स चार्ज
- बीपीएल उपभोक्ताओं के लिए: 1 किलोवाट पर 50 रुपये फिक्स चार्ज
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