झारखंड में माओवाद का खात्मा, 26 साल में सुरक्षा बलों ने बरामद किए 682 हथियार

HIGHLIGHTS
- झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से माओवाद की समस्या से जूझता रहा।
- अभियान में झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों के 600 से अधिक जवान-अधिकारी बलिदान हुए।
- सैकड़ों माओवादी मारे गए और बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण व गिरफ्तारियां हुईं।
रांची। झारखंड में माओवाद के खिलाफ चलाया गया अभियान अब अपने अंजाम तक पहुंच चुका है। अलग राज्य बनने के बाद से माओवाद की समस्या से जूझ रहे झारखंड में अब माओवादियों का खात्मा हो चुका है। इस लंबे अभियान के दौरान झारखंड पुलिस और केंद्रीय बलों के 600 से अधिक जवान और अधिकारी बलिदान हो चुके हैं।
इस दौरान सैकड़ों माओवादी मारे गए, जबकि बड़ी संख्या में माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया और गिरफ्तारियां भी हुईं। 26 साल के इस सफर में सुरक्षा बलों ने माओवादियों के कब्जे से 682 अत्याधुनिक हथियार बरामद किए। इनमें सबसे अधिक हथियार ऐसे हैं, जो पुलिस से लूटे गए थे।
बरामद हथियारों की संख्या इतनी है कि इससे आधे से अधिक बटालियन के जवानों को हथियार उपलब्ध कराए जा सकते हैं। एक बटालियन में 10 कंपनियां होती हैं और प्रत्येक कंपनी में 80 से 100 जवान-अधिकारी होते हैं।
झारखंड पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2000 से 2004 के बीच एक भी हथियार बरामद नहीं हुआ था। इसके बाद वर्ष 2005 से अगस्त 2026 तक कुल 682 हथियार बरामद किए गए।
बरामद हथियारों में 93 एके-47, 10 एलएमजी, 111 इंसास, 123 एसएलआर, 28 कार्बाइन और 247 .303 राइफल शामिल हैं। इसके अलावा माओवादियों के पास से 70 अन्य हथियार भी बरामद हुए हैं।
इन बरामदगियों के बावजूद पुलिस का अभियान जारी रहा और पुलिस चुप नहीं बैठी है।
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