उत्तराखंड हिमालय के नीचे हर 100 साल में 8.1 तीव्रता के भूकंप जितनी ऊर्जा जमा होने का अनुमान

HIGHLIGHTS
- मेन हिमालयन थ्रस्ट में प्लेटों की गति के कारण भूगर्भीय तनाव बढ़ रहा है।
- अध्ययन में GPS और रडार सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण किया गया।
- शोध के मुताबिक, फॉल्ट पर हर साल करीब 18 मिमी का स्लिप डेफिसिट दर्ज किया गया।
देहरादून। उत्तराखंड हिमालय के नीचे हर 100 साल में 8.1 तीव्रता के भूकंप के बराबर ऊर्जा जमा होने का अनुमान वैज्ञानिकों ने लगाया है। इस अध्ययन का शोध सार 2 अक्टूबर को यूरोपीय भूविज्ञान संघ ने ऑनलाइन प्रकाशित किया है।
अध्ययन के मुताबिक, भारतीय प्लेट और हिमालय के बीच स्थित मुख्य हिमालयी थ्रस्ट का बड़ा हिस्सा अवरुद्ध है। इसके चलते प्लेटों की गति से उत्पन्न तनाव लगातार जमा हो रहा है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर 100 साल में भूकंप आना निश्चित है।
हर साल 18 मिलीमीटर का खिसकाव अंतर
तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के शोधकर्ता दिब्यशक्ति पांडा और उनके सहयोगियों ने उपग्रह स्थिति निर्धारण प्रणाली और रडार उपग्रहों से मिले आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में मुख्य हिमालयी थ्रस्ट पर हर साल करीब 18 मिलीमीटर का खिसकाव अंतर पाया गया।
इसका अर्थ है कि प्लेटों की अपेक्षित गति और भ्रंश पर वास्तव में होने वाले खिसकाव के बीच अंतर बना हुआ है।
115 किलोमीटर चौड़ा हिस्सा अवरुद्ध
शोध के अनुसार, मुख्य हिमालयी थ्रस्ट का करीब 115 किलोमीटर चौड़ा हिस्सा अवरुद्ध है। उपग्रह रडार से मिले आंकड़ों में जमीन का अधिकतम ऊर्ध्वाधर उठाव भी हर साल चार से छह मिलीमीटर दर्ज किया गया।
वैज्ञानिकों ने इन आंकड़ों के आधार पर भूगर्भीय मॉडल तैयार किया। इसके नतीजों से उत्तराखंड हिमालय के नीचे प्लेटों के बीच मजबूत जुड़ाव और तनाव के लगातार जमा होने के संकेत मिले।
अध्ययन में जमा हो रही भूकंपीय ऊर्जा की तुलना हर 100 साल में 8.1 तीव्रता के एक बड़े भूकंप से की गई है। हालांकि, यह ऊर्जा जमा होने का अनुमान है, न कि भूकंप आने की कोई निश्चित समय-सारिणी। वैज्ञानिकों ने यह दावा नहीं किया है कि अगला बड़ा भूकंप कब आएगा या उसकी तीव्रता निश्चित रूप से कितनी होगी।
उत्तराखंड में बड़े भूकंपों का इतिहास
| वर्ष | भूकंप | तीव्रता (मैग्नीट्यूड) |
|---|---|---|
| 1803 | गढ़वाल भूकंप | 7.8 |
| 1991 | उत्तरकाशी भूकंप | 6.8 |
| 1999 | चमोली भूकंप | 6.4 |
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