दिल्ली में इंटरनेट बंद करने पर गृह सचिव ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी

HIGHLIGHTS
- 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं।
- गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट में चार पन्नों का हलफनामा दाखिल किया।
- DMRC ने मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बंद होने के आरोपों को खारिज किया।
नई दिल्ली। दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक चार किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद की गई थीं। मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने के मामले में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी अवमानना नोटिस के जवाब में गृह सचिव ने बुधवार देर रात चार पन्नों का हलफनामा दाखिल किया। इसमें उन्होंने माफी मांगने के साथ अपने फैसले का बचाव भी किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने, शांति कायम रखने और सुरक्षा की गंभीर स्थिति को देखते हुए 24 घंटे के लिए केवल सेलुलर इंटरनेट सेवाएं बंद करना उचित और आवश्यक कदम था।
क्यों बंद की गईं इंटरनेट सेवाएं?
बुधवार देर रात दाखिल हलफनामे में गृह सचिव ने कहा कि दिल्ली पुलिस की ओर से मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का अनुरोध स्थिति की गंभीरता और राजधानी में कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए उचित था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया।
बता दें कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस आदेश के उल्लंघन पर गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और डीएमआरसी अध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी किया था, जिसमें इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रखने का निर्देश दिया गया था।
DMRC ने भी मांगी बिना शर्त माफी
इससे पहले दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने भी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी थी। डीएमआरसी की चेयरपर्सन डी. थारा ने लंबित अवमानना याचिका में दाखिल हलफनामे में 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बंद होने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों के बावजूद मेट्रो नेटवर्क के अधिकांश हिस्सों में परिचालन जारी रहा।
DMRC के हलफनामे के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को भेजे गए शुरुआती पत्र में 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का अनुरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देश के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई और प्रभावित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई। इन स्टेशनों पर भी 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक सभी प्रतिबंध हटा लिए गए।
DMRC ने अपने हलफनामे में कहा कि निगम अदालत के आदेशों का सम्मान करता है और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर मेट्रो सेवाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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