89 दिन के धरने के बाद टूटी उम्मीद, सेंट्रल मार्केट के लोगों को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

HIGHLIGHTS
- मेरठ सेंट्रल मार्केट प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट से ईडब्ल्यूएस मकानों को राहत नहीं मिलने के बाद प्रभावित परिवारों और व्यापारियों में निराशा बढ़ गई है।
- 89 दिनों से जारी धरने के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि पहले कारोबार प्रभावित हुआ और अब घरों पर कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है।
- स्थानीय लोगों का दावा है कि कार्रवाई का सबसे अधिक असर कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा, जिनसे हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है।
मेरठ। शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट से ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मकानों को राहत नहीं मिलने के बाद प्रभावित परिवारों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। लंबे समय से सेटबैक कार्रवाई के विरोध में धरना दे रही महिलाओं और स्थानीय लोगों ने फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि पहले व्यापार प्रभावित हुआ और अब घरों पर कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा है।
89 दिन से जारी धरना, फैसले के बाद कई महिलाएं हुईं भावुक
गोल मंदिर, सेक्टर-3 और सेक्टर-4 चौराहे पर पिछले करीब तीन महीने से महिलाएं अपने मकानों और दुकानों को बचाने की मांग को लेकर धरना दे रही थीं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी मिलने के बाद धरना स्थल पर माहौल भावुक हो गया।
धरने के दौरान रोजाना धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा था। मंगलवार सुबह हनुमान चालीसा और दोपहर में सुंदरकांड का पाठ कर लोगों ने राहत की उम्मीद जताई थी, लेकिन अदालत के फैसले के बाद कई प्रदर्शनकारियों की उम्मीदें टूट गईं। कुछ महिलाओं ने इसके बाद धरना समाप्त करने का निर्णय भी लिया।
व्यापार ठप होने के बाद अब मकानों की चिंता
प्रभावित व्यापारियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से उन्होंने छोटे कारोबार और घर बनाए थे। कार्रवाई के चलते पहले दुकानों पर असर पड़ा और अब मकानों को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि छोटे व्यापारों से ही परिवारों का खर्च चलता था, लेकिन मौजूदा हालात में आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों ने प्रशासन से मानवीय आधार पर समाधान निकालने की मांग की है।
अधिकारियों पर लगाए आरोप
स्थानीय व्यापारियों ने इस स्थिति के लिए आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि सेंट्रल मार्केट वर्षों से व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां रहने वाले हजारों परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी है।
लोगों का कहना है कि घरों से चलने वाले छोटे व्यवसाय बंद होने से बच्चों की पढ़ाई और परिवार का पालन-पोषण प्रभावित हो रहा है। प्रभावित परिवारों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनके लिए दोबारा रोजगार शुरू करना आसान नहीं होगा।
हजारों लोगों पर पड़ सकता है असर
स्थानीय जानकारी के अनुसार, स्कीम नंबर-7 के तहत सेक्टर-1 से सेक्टर-13 तक बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम आकार के मकान हैं। इनमें करीब तीन हजार लोग रहते हैं और कई भवनों में एक से अधिक परिवार निवास कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि कार्रवाई आगे बढ़ती है तो इसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा।
क्या है सेटबैक नियम?
सेटबैक यानी निर्धारित खुला स्थान भवन और भूखंड की सीमा के बीच छोड़ी जाने वाली अनिवार्य जगह होती है। इसका उद्देश्य भवन में रोशनी और हवा की व्यवस्था बनाए रखना तथा आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराना है। भवन निर्माण नियमों के तहत इसका पालन जरूरी माना जाता है।
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