पहले शहजाद, अब शंकर... सनातन धर्म अपनाने के बाद पहली बार कांवड़ यात्रा पर निकला सहारनपुर का परिवार

HIGHLIGHTS
- सहारनपुर के एक परिवार ने सनातन धर्म अपनाने के बाद पहली बार कांवड़ यात्रा शुरू की।
- पहले शहजाद के नाम से जाने जाने वाले श्रद्धालु अब शंकर नाम से कांवड़ यात्रा कर रहे हैं।
- परिवार हरिद्वार से गंगाजल लेकर गाजियाबाद के दूधेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए निकला है।
मेरठ। सावन माह की कांवड़ यात्रा के दौरान इस बार एक ऐसा जत्था भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना, जिसमें शामिल श्रद्धालुओं ने स्वयं को पहले मुस्लिम और अब सनातन धर्म का अनुयायी बताया। सहारनपुर के बेहड़ी गुर्जर निवासी शंकर, जिन्हें पहले शहजाद के नाम से जाना जाता था, अपनी पत्नी सावित्री और साथियों के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक के लिए निकले हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि जून 2026 में उन्होंने परिवार सहित हरिद्वार में सनातन धर्म अपनाया था। धर्म परिवर्तन के बाद शहजाद ने अपना नाम शंकर और उनकी पत्नी सना ने अपना नाम सावित्री रखा। अब सनातन धर्म अपनाने के बाद यह उनकी पहली कांवड़ यात्रा है।
शंकर ने बताया कि वह पत्नी सावित्री और अन्य साथियों के साथ हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर दूधेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने जा रहे हैं। उनके साथ बिजनौर निवासी राजन समेत अन्य श्रद्धालु भी यात्रा में शामिल हैं। सभी का दावा है कि धर्म परिवर्तन के बाद वे पहली बार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से सनातन धर्म अपनाया। अब भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और एक मन्नत पूरी होने पर वह पहली बार कांवड़ लेकर निकले हैं। उनके अनुसार, यह यात्रा उनके लिए शिव भक्ति और आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है।
शंकर का दावा है कि धर्म परिवर्तन के बाद उन्हें समाज का सहयोग और अपनापन मिला, जिससे उनकी धार्मिक आस्था और अधिक मजबूत हुई। यात्रा के दौरान गंग नहर पटरी मार्ग पर कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और कांवड़ सेवा शिविरों की ओर से उनके जत्थे का स्वागत किया गया। पुष्पवर्षा की गई, फूल-मालाएं पहनाई गईं और जलपान की व्यवस्था भी की गई।
पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष सुनाई देते रहे। शंकर ने बताया कि यह उनके जीवन की पहली कांवड़ यात्रा है और उनका जत्था गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल अर्पित कर यात्रा का समापन करेगा।
पहले भी चर्चा में रहा था मामला
शंकर के अनुसार, जून 2026 में उन्होंने परिवार सहित हरिद्वार में सनातन धर्म अपनाने का दावा किया था। इसके बाद उन्होंने अपना नाम शहजाद से बदलकर शंकर और पत्नी का नाम सावित्री रखा। उस समय भी यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना था। अब पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल होने के कारण उनका जत्था एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा में है।
धर्म परिवर्तन का दावा करने वाले श्रद्धालुओं की पहली कांवड़ यात्रा
रविवार को मेरठ में गंगनहर पटरी मार्ग पर यह जत्था लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। इसमें शामिल श्रद्धालुओं ने स्वयं को पहले मुस्लिम और अब सनातन धर्म का अनुयायी बताया। उनका कहना था कि धर्म परिवर्तन के बाद वे पहली बार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने उनका स्वागत किया। पुष्पवर्षा की गई, फूल-मालाएं पहनाई गईं और जलपान भी कराया गया। शंकर ने बताया कि वह पहले शहजाद के नाम से जाने जाते थे। उनके साथ उनकी पत्नी सावित्री भी यात्रा में शामिल हैं, जिनका दावा है कि उन्होंने भी सनातन धर्म अपनाया है।
दोनों गंगाजल लेकर गाजियाबाद के दूधेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने जा रहे हैं। उनके साथ बिजनौर निवासी राजन समेत अन्य श्रद्धालु भी शामिल हैं। सभी का कहना है कि उन्होंने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाया और अब भगवान शिव की आराधना के उद्देश्य से कांवड़ यात्रा कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं का दावा है कि धर्म परिवर्तन के बाद उन्हें समाज का सहयोग और अपनापन मिला, जिससे उनकी धार्मिक आस्था और मजबूत हुई। यात्रा के दौरान कई कांवड़ सेवा शिविरों और सामाजिक संगठनों की ओर से जत्थे का स्वागत किया गया।
श्रद्धालुओं को फूल-मालाएं पहनाई गईं और जलपान भी कराया गया। पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष गूंजते रहे। शंकर ने बताया कि यह उनकी पहली कांवड़ यात्रा है और उनका जत्था गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल अर्पित कर यात्रा का समापन करेगा।
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