इसरो ने बढ़े हुए थ्रस्ट पर CE20 इंजन का किया सफल परीक्षण, LVM3 मिशन को मिलेगा फायदा

HIGHLIGHTS
- परीक्षण के दौरान LTPM का प्रदर्शन भी सफलतापूर्वक किया गया
- LTPM को गगनयान मिशन के C32 स्टेज के लिए विकसित किया गया है
- CE20 इंजन LVM3 के अपर क्रायोजेनिक स्टेज को पावर देता है
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन के बढ़े हुए थ्रस्ट स्तर पर ‘फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट’ सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस परीक्षण से एलवीएम3 लॉन्च व्हीकल की पेलोड क्षमता बढ़ाने और गगनयान कार्यक्रम को आगे ले जाने में मदद मिलेगी। इसरो ने गुरुवार को बताया कि परीक्षण 9 सितंबर को तमिलनाडु के महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) में किया गया।
इसरो ने परीक्षण को लेकर क्या बताया?
अंतरिक्ष एजेंसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि आगामी एलवीएम3 मिशन के सी32 अपर स्टेज के लिए निर्धारित सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन के बढ़े हुए थ्रस्ट पर ‘फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट’ 9 सितंबर, 2026 को महेंद्रगिरी स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
इसरो के मुताबिक, परीक्षण के दौरान एलओएक्स टैंक प्रेशराइजेशन मॉड्यूल (एलटीपीएम) के प्रदर्शन को भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया। यह मॉड्यूल गगनयान मिशन के सी32 स्टेज के लिए विकसित किया गया है।
सीई20 इंजन क्या करता है?
सीई20 इंजन एलवीएम3 लॉन्च व्हीकल के अपर क्रायोजेनिक स्टेज को शक्ति प्रदान करता है। भविष्य के एलवीएम3 मिशनों में पेलोड क्षमता बढ़ाने के लिए अंतरिक्ष एजेंसी सीई20 इंजन के इस्तेमाल के साथ 22-टन थ्रस्ट वाले अपग्रेडेड सी32 स्टेज पर काम कर रही है।
यह परीक्षण मार्च में महेंद्रगिरी संयंत्र में 22 टन के थ्रस्ट स्तर पर किए गए सीई20 इंजन के समुद्र तल पर हुए हॉट टेस्ट के बाद किया गया है। उस परीक्षण में नोजल प्रोटेक्शन सिस्टम और मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का इस्तेमाल किया गया था।
मार्च के परीक्षण का उद्देश्य क्या था?
मार्च में हुआ परीक्षण इस थ्रस्ट स्तर पर समुद्र तल पर इंजन की टेस्टिंग के लिए उसकी योग्यता का आकलन करने के उद्देश्य से किया गया था। इसरो ने तब बताया था कि 165 सेकंड तक चले परीक्षण के दौरान इंजन और परीक्षण सुविधा ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया।
सीई20 के हाई-एरिया-रेशियो नोजल में एग्जिट प्रेशर कम होने के कारण समुद्र तल पर इसकी टेस्टिंग काफी चुनौतीपूर्ण होती है। इसरो के अनुसार, नोजल के अंदर फ्लो सेपरेशन से अत्यधिक वाइब्रेशन और थर्मल स्ट्रेस पैदा हो सकते हैं, जिसका असर नोजल की संरचनात्मक मजबूती पर पड़ सकता है।
हाल में हुए सफल फ्लाइट एक्सेप्टेंस टेस्ट के साथ आगामी एलवीएम3 मिशनों के लिए अपग्रेडेड सी32 स्टेज को परिचालन में लाने की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ा है।
यह घटनाक्रम 5 सितंबर को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ17 के जरिए एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-05 (ईओएस-05) के सफल प्रक्षेपण के कुछ समय बाद सामने आया है।
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