अबू सलेम की तत्काल रिहाई की मांग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश रखा बरकरार

HIGHLIGHTS
- अबू सलेम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी है
- पुर्तगाल से भारत लाने के लिए उसके प्रत्यर्पण की लंबी कानूनी प्रक्रिया चली थी
- 11 नवंबर 2005 को अबू सलेम का भारत प्रत्यर्पण किया गया था
गैंगस्टर अबू सलेम ने भारत की जेल से रिहाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सलेम का कहना था कि वह भारत में 25 साल जेल की सजा काट चुका है और पुर्तगाल से उसके प्रत्यर्पण के वक्त भारत ने जिन शर्तों को स्वीकार किया था, उनके तहत उसकी जेल की अवधि 25 साल से अधिक नहीं हो सकती। इसी आधार पर उसने तुरंत रिहा किए जाने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने गुरुवार को अबू सलेम की याचिका पर फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के अप्रैल में दिए गए आदेश को बरकरार रखा।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सलेम की तत्काल रिहाई की मांग को ‘समय से पहले’ और ‘गलत आधार पर’ दायर की गई याचिका माना था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देने वाली सलेम की याचिका को खारिज कर दिया।
प्रत्यर्पण के समय क्या 25 साल की शर्त थी?
भारत और पुर्तगाल के बीच अबू सलेम के प्रत्यर्पण को लेकर तय शर्तों में दो अहम बातें शामिल थीं। पहली शर्त थी कि सलेम को भारत में मौत की सजा नहीं दी जा सकती। दूसरी शर्त के मुताबिक उसकी जेल की अवधि 25 साल से अधिक नहीं हो सकती थी।
अबू सलेम ने अपनी रिहाई की मांग में इन्हीं शर्तों का हवाला दिया था। उसका दावा था कि 25 साल पूरे होने के बाद उसे जेल से रिहा कर दिया जाना चाहिए।
अबू सलेम को भारत कब लाया गया था?
अबू सलेम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी है। उसे पुर्तगाल से भारत लाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया चली थी। इसके बाद 11 नवंबर 2005 को उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया।
प्रत्यर्पण के दौरान भारत और पुर्तगाल के बीच जिन शर्तों पर सहमति बनी थी, बाद में अबू सलेम ने उन्हीं शर्तों को अपनी रिहाई की मांग का आधार बनाया।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम को तत्काल रिहा करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उसकी याचिका खारिज करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फैसले का विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं किया है। विस्तृत फैसला आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पीठ ने सलेम की दलील को किस आधार पर खारिज किया है।
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