कोलकाता के मोमिनपुर में बदली जन्माष्टमी की परंपरा, अब केवल हिंदुओं के लिए होगा आयोजन

HIGHLIGHTS
- मोमिनपुर में यह आयोजन करीब छह दशक पहले शुरू हुआ था।
- जन्माष्टमी की शुरुआत मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ता एम. काशिम ने की थी।
- साल 2011 में स्थानीय मुस्लिम युवाओं ने आयोजन को दोबारा शुरू किया था।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मोमिनपुर इलाके से सामने आई एक खबर ने वर्षों पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां करीब 60 वर्षों से हिंदू और मुस्लिम समुदाय मिलकर जन्माष्टमी मनाते आ रहे थे, लेकिन इस साल से इस आयोजन को पूरी तरह 'केवल हिंदुओं' के लिए कर दिया गया है। इस बदलाव के साथ इलाके में चली आ रही पुरानी अंतर-धार्मिक परंपरा में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है।
समझिए क्या है पूरा मामला?
मोमिनपुर में जन्माष्टमी मनाने की यह परंपरा करीब छह दशक पहले मुस्लिम सामाजिक कार्यकर्ता एम. काशिम ने शुरू की थी। हालांकि कुछ समय बाद यह आयोजन बंद हो गया था। साल 2011 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सत्ता में आने के बाद स्थानीय मुस्लिम युवाओं ने इसे दोबारा शुरू किया। बीते कई वर्षों से आयोजन समिति में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग शामिल होते रहे और मिलकर सभी रीति-रिवाज निभाते थे।
समिति के पूर्व पदाधिकारी और टीएमसी नेता एम. आलम के अनुसार, 20 सदस्यों वाली कमेटी में आधे सदस्य मुस्लिम थे। सभी लोग मिलकर प्रसाद बांटते और त्योहार मनाते थे। लेकिन अपने 50वें साल में पहुंच रहा यह आयोजन इस बार बदले हुए रूप में नजर आ रहा है। पंडाल के पास एक बड़ा भगवा रंग का बैनर भी लगाया गया है।
क्यों आया यह बदलाव?
बताया जा रहा है कि इस बदलाव के पीछे बीजेपी नेता राकेश सिंह की भूमिका है, जो हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में पोर्ट निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हार गए थे। खुद को आयोजन समिति का अध्यक्ष और चेयरपर्सन बताने वाले राकेश सिंह का कहना है कि अब इस आयोजन में मुसलमानों की कोई भूमिका नहीं होगी, क्योंकि जन्माष्टमी हिंदू त्योहार है।
उन्होंने कहा कि अपनी पारंपरिक संस्कृति को कमतर नहीं आंका जा सकता। दूसरे धर्मों के लोग पंडाल में आ सकते हैं, लेकिन धार्मिक गतिविधियों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। उनके मुताबिक जन्माष्टमी हिंदू त्योहार है और इसे केवल हिंदुओं द्वारा ही मनाया जाना चाहिए। वहीं, समिति से जुड़े एक अन्य व्यक्ति ने इस बदलाव को 'शुद्धिकरण' जैसा बताया है।
VHP की विचारधारा का असर भी समझिए
दूसरी ओर, माना जा रहा है कि यह बदलाव विश्व हिंदू परिषद (VHP) के हालिया अभियान के बाद हुआ है। इस अभियान के तहत कोलकाता के दुर्गा पूजा आयोजकों से हिंदू संस्कृति और विरासत को संरक्षित रखने, मूर्तियों के स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं करने और पंडालों के अंदर मांसाहारी भोजन पर रोक लगाने की अपील की गई थी।
राकेश सिंह ने भी माना कि उनका रुख VHP की इसी विचारधारा के अनुरूप है, जिसके तहत धर्म और त्योहार उसी समुदाय के पास होने चाहिए।
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