जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की मान्यता खत्म करने पर कपिल सिब्बल ने मोदी सरकार को घेरा

HIGHLIGHTS
- कपिल सिब्बल ने बेरोजगारी, आर्थिक संकट और सार्वजनिक निवेश में कमी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
- उन्होंने जंतर-मंतर के बजाय रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने के विकल्प पर आपत्ति जताई।
- सिब्बल ने न्यूयॉर्क, लंदन और पेरिस में विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों का उदाहरण दिया।
नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता समाप्त किए जाने को लेकर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने केंद्र की मोदी सरकार की आलोचना की है। शनिवार को उन्होंने कहा कि देश में ऐसी स्थिति बन गई है, जहां विरोध करना ही अपराध माना जाने लगा है। सिब्बल ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट लोगों के विरोध करने के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करेगा।
निर्दलीय सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि भारी बेरोजगारी, आर्थिक संकट और सार्वजनिक निवेश में कमी के कारण लोगों का सरकार पर भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार जितनी जल्दी सत्ता से हटेगी, देश के लिए उतना ही अच्छा होगा।
एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने कहा, 'हम आज ऐसी स्थिति में हैं जहां विरोध करना एक अपराध बन गया है। दूसरे शब्दों में कहें तो, विरोध करने का अधिकार अब एक अपराध बन गया है, जबकि हमारे देश में विरोध करना एक मौलिक अधिकार है। लेकिन अब यह मौलिक अधिकार नहीं रह गया है।'
जंतर-मंतर को लेकर सरकार से सिब्बल के सवाल
जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में मान्यता समाप्त करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए सिब्बल ने कहा कि अब लोगों के पास रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने का विकल्प है, लेकिन वहां दशहरा उत्सव चलने के कारण विरोध करना संभव नहीं होगा।
उन्होंने सवाल किया, 'जब मेरे पास विरोध-प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर जैसी जगह थी, तो मुझे रामलीला मैदान क्यों जाना पड़े? और आपने उस जगह को क्यों रद्द कर दिया?'
सिब्बल ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर पहले हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा बाहरी लोगों की वजह से हुई थी। उन्होंने दावा किया कि वहां बिना किसी स्पष्टीकरण के पत्थरों से भरा एक ट्रक लाया गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात लोगों और सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने हिंसा की।
सिब्बल के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को घसीटा गया, उन पर लाठीचार्ज किया गया और महिलाओं के साथ मारपीट की गई।
उन्होंने कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान परिवहन सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गईं। इनमें मेट्रो सेवाओं को रोकना और दिल्ली आने वाली ट्रेनों पर प्रतिबंध लगाना शामिल था।
न्यूयॉर्क, लंदन और पेरिस का दिया उदाहरण
विरोध-प्रदर्शन के लिए जगह तय करने के मुद्दे पर सिब्बल ने न्यूयॉर्क, लंदन और पेरिस जैसे शहरों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन शहरों के प्रमुख क्षेत्रों में ऐसी जगहें निर्धारित हैं, जहां लोग महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों के पास विरोध-प्रदर्शन कर सकते हैं।
सिब्बल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को 'विश्वगुरु' बताया जाता है और उसकी लोकतांत्रिक परंपराओं को दुनिया के लिए मिसाल कहा जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार विदेशों में विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करती है, लेकिन देश के भीतर इन्हीं अधिकारों को दबाया जा रहा है।
सरकार को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा, 'यह 'प्रेशर कुकर' किसी भी दिन फट सकता है और इसके लिए पूरी तरह से आप ही जिम्मेदार होंगे।'
'जंतर-मंतर 2.0' को लेकर क्या बोले कपिल सिब्बल?
संविधान के अनुच्छेद 19(1) का उल्लेख करते हुए सिब्बल ने कहा कि विरोध करने के अधिकार पर कुछ उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इनमें राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े प्रतिबंध शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर पहले हुए विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे थे। सिब्बल ने दावा किया कि 10 अक्टूबर को प्रस्तावित 'जंतर-मंतर 2.0' भी शांतिपूर्ण रहता।
उन्होंने राहुल गांधी और 'इंडिया' गठबंधन के सहयोगियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च का भी उल्लेख किया। सिब्बल के अनुसार, यह मार्च बिना किसी हिंसा के संपन्न हुआ था।
उन्होंने सवाल उठाया कि विरोध कर रहे युवाओं के साथ अलग तरह का व्यवहार क्यों किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने पूछा कि ऐसे प्रदर्शनों से राज्य को क्या खतरा हो सकता है।
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