आरजी कर केस: संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, पीड़िता के पिता ने CBI की जांच पर उठाए सवाल

HIGHLIGHTS
- पीड़िता के पिता ने जांच एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की।
- डॉक्टरों ने जांच में देरी को लेकर नाराजगी जताई।
- अनिकेत महतो ने दो साल में गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
कोलकाता। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद पीड़िता के पिता ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को अपने काम के लिए जवाबदेह होना चाहिए। अगस्त 2024 में अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में आया था। अब अस्पताल में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में संदीप घोष को जमानत मिलने के बाद सीबीआई की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।
पीड़िता के पिता ने कहा कि अगर 147 करोड़ लोगों का भरोसा हासिल करने वाली जांच एजेंसी के काम में इतनी कमियां हैं, तो लोग उस पर विश्वास कैसे बनाए रखेंगे। हालांकि, उन्होंने इसके लिए सरकार को सीधे जिम्मेदार ठहराने से इनकार करते हुए कहा कि सीबीआई एक स्वतंत्र जांच एजेंसी है।
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को संदीप घोष को अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में जमानत दी थी। इससे पहले विशेष सीबीआई अदालत और कलकत्ता हाई कोर्ट में उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं।
पीड़िता के पिता ने सीबीआई की जवाबदेही पर उठाए सवाल
पीड़िता के पिता ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर लोगों का भरोसा हासिल करने वाली संस्था के काम में कमियां सामने आती हैं, तो जनता का विश्वास कैसे बना रहेगा। उन्होंने सरकार को सीधे दोष देने के बजाय सीबीआई की भूमिका और जवाबदेही पर सवाल उठाए।
अगस्त 2024 में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद अस्पताल में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसी दौरान संदीप घोष को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से उन्हें मिली ताजा जमानत वित्तीय अनियमितताओं के मामले में है, न कि दोनों मामलों में एक साथ।
डॉक्टरों ने जमानत के फैसले पर जताई नाराजगी
पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन कर रहे डॉक्टरों ने भी संदीप घोष को जमानत मिलने पर नाराजगी जताई। डॉक्टर उत्पल बंद्योपाध्याय ने मामले की जांच में देरी को लेकर सीबीआई से सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जमानत के आदेश से न्याय की मांग कर रहे लोगों को गहरी निराशा, दुख और गुस्सा हुआ है। बंद्योपाध्याय ने मुकदमे की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में तेजी से पूरी करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने अपराध में कथित रूप से शामिल लोगों और राज्य के स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार तथा डर का माहौल बनाने के आरोपों से जुड़े लोगों के खिलाफ जल्द कार्रवाई करने की मांग भी की।
अनिकेत महतो ने जांच में गंभीर कमियों का लगाया आरोप
आंदोलन से जुड़े एक अन्य प्रमुख डॉक्टर अनिकेत महतो ने इस घटनाक्रम को न्याय की लड़ाई लड़ रहे लोगों के लिए बेहद दुखद बताया। उन्होंने वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सीबीआई की जांच में गंभीर कमियां होने का आरोप लगाया।
एबीपी आनंद को दिए बयान में महतो ने कहा कि जांच एजेंसी ने 147 लोगों को गवाहों की सूची में शामिल किया था, लेकिन दो साल में केवल सात लोगों के बयान दर्ज किए गए। उन्होंने सीबीआई की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि लंबी चलती कार्यवाही के कारण मामला कमजोर हुआ है। ये आरोप अनिकेत महतो ने लगाए हैं।
संदीप घोष को पहले किस मामले में मिली थी जमानत?
संदीप घोष ने विशेष सीबीआई अदालत से जमानत याचिका खारिज होने और कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
इससे पहले दिसंबर 2024 में सियालदह अदालत ने उन्हें दुष्कर्म और हत्या के मामले में जमानत दी थी। उस समय सीबीआई अनिवार्य 90 दिनों की अवधि के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाई थी। हालांकि, दुष्कर्म और हत्या के मामले में जमानत मिलने के बाद भी संदीप घोष वित्तीय अनियमितताओं के मामले में हिरासत में थे।
अब सुप्रीम कोर्ट से वित्तीय अनियमितताओं के मामले में भी जमानत मिलने के बाद पीड़िता के पिता और आंदोलन से जुड़े डॉक्टरों ने सीबीआई की जवाबदेही और मुकदमे की सुनवाई में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए हैं।
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