ब्राजील में लूला की ऐतिहासिक वापसी, चौथी बार बने राष्ट्रपति; पीएम मोदी ने दी बधाई

HIGHLIGHTS
- दूसरे चरण के मतदान में लूला को 51.8% वैध वोट मिले।
- फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.2% वोटों से संतोष करना पड़ा।
- पीएम मोदी ने भारत-ब्राजील रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव में शानदार वापसी करते हुए चौथी बार जीत दर्ज की है। उनकी इस जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि वह भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए लूला के साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।
रविवार को हुए दूसरे चरण के मतदान में लूला ने दक्षिणपंथी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो को शिकस्त दी। ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (टीएसई) के आंकड़ों के अनुसार, सभी मतदान केंद्रों पर मतगणना पूरी होने के बाद लूला को 51.8 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो के खाते में 48.2 प्रतिशत वोट आए। दोनों उम्मीदवारों के बीच करीब 44 लाख मतों का अंतर रहा।
लूला की जीत को क्यों माना जा रहा है खास?
लूला की जीत कई मायनों में अहम है। चार अक्टूबर को हुए पहले चरण के चुनाव में वह फ्लावियो बोल्सोनारो से पीछे रह गए थे, लेकिन दूसरे चरण में उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए जीत हासिल की। करीब चार दशक पहले प्रत्यक्ष चुनाव व्यवस्था बहाल होने के बाद यह पहला अवसर है, जब पहले चरण में दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार अंतिम चरण में जीतकर राष्ट्रपति बना है। लूला ब्राजील के पहले ऐसे राष्ट्रपति भी होंगे, जो चार कार्यकाल पूरे करेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लूला को बधाई दी। उन्होंने लिखा, "मेरे प्रिय मित्र, राष्ट्रपति लूला को उनकी शानदार चुनावी जीत पर हार्दिक बधाई। मैं भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा इसका विस्तार करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं।"
पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत और ब्राजील विभिन्न क्षेत्रों में अपना सहयोग बढ़ाते रहेंगे। दोनों देश ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अधिक समावेशी, समानतापूर्ण और टिकाऊ दुनिया के निर्माण के लिए मिलकर काम करेंगे।
भारत-ब्राजील संबंधों को मिल सकती है नई गति
लूला की सत्ता में वापसी का प्रभाव ब्राजील की घरेलू राजनीति से आगे भी देखने को मिल सकता है। वह पश्चिमी गोलार्ध में ब्रिक्स के प्रमुख समर्थकों में गिने जाते हैं। भारत ने 2026 में इस समूह की अध्यक्षता संभाली है और इस साल दोनों देशों के संबंधों में तेजी आई है। ऐसे में लूला की जीत से भारत के साथ मौजूदा सहयोग आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।
हालांकि, लूला के सामने कई चुनौतियां भी हैं। ब्राजील की संसद में कमजोर समर्थन, आर्थिक दबाव और अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव उनके नए कार्यकाल को मुश्किल बना सकते हैं।
पहले चरण में पिछड़ने के बाद लूला ने कैसे पलटी बाजी?
चुनाव से करीब तीन सप्ताह पहले तक लूला की स्थिति मजबूत नहीं मानी जा रही थी। चार अक्टूबर को हुए पहले चरण के मतदान में फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.03 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि लूला को 45.16 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। उस समय दोनों उम्मीदवारों के बीच करीब 22 लाख वोटों का अंतर था।
फ्लावियो, जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के सबसे बड़े बेटे हैं। पहले चरण में उनकी बढ़त ने चुनावी सर्वेक्षणों के अनुमानों को भी गलत साबित कर दिया था।
पहले चरण के नतीजों के बाद ब्राजील के वित्तीय बाजारों में तेजी देखने को मिली। अगले कारोबारी दिन देश का इबोवेस्पा शेयर सूचकांक रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। दूसरे चरण से पहले जारी कई सर्वेक्षणों में दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर का अनुमान लगाया गया था। कुछ सर्वेक्षणों में फ्लावियो को मामूली बढ़त भी दिखाई गई थी।
रविवार रात शुरुआती मतगणना में फ्लावियो आगे चल रहे थे। हालांकि, उत्तर-पूर्वी ब्राजील के नतीजे सामने आने के बाद लूला ने बढ़त बना ली। यह इलाका लंबे समय से उनका मजबूत राजनीतिक आधार रहा है।
पहले चरण में मतदान का प्रतिशत करीब 78.9 रहा था, जो दूसरे चरण में बढ़कर लगभग 80.8 प्रतिशत हो गया। एटलसइंटेल के प्रमुख आंद्रेई रोमन के मुताबिक, मतदान से दूर रहने वाले लोगों की संख्या में कमी आने से लूला को फायदा मिला हो सकता है। पहले चरण में करीब 21 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट नहीं डाला था। वर्ष 1998 के बाद किसी आम चुनाव में यह सबसे अधिक आंकड़ा था।
चौथे कार्यकाल में लूला के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां
लूला का नया कार्यकाल संसद में सीमित समर्थन के बीच शुरू होगा। चार अक्टूबर को हुए चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी (पीएल) ने 513 सदस्यीय चैंबर ऑफ डेप्युटीज में 121 सीटें हासिल कीं। वर्ष 2022 में पार्टी के पास 99 सीटें थीं। निर्वाचन न्यायालय के आंकड़ों के अनुसार, पीएल अब संसद का सबसे बड़ा दल बन गया है।
दक्षिणपंथी दलों के पास कुल मिलाकर करीब 276 सीटें हैं। हालांकि, संविधान में संशोधन के लिए आवश्यक 308 सीटों के मुकाबले यह संख्या कम है।
ऐसे में संसद में सेंट्राओ के नाम से पहचाने जाने वाले मध्य-दक्षिणपंथी दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ये दल अक्सर सरकारी पदों और बजट में हिस्सेदारी के बदले सरकार को समर्थन देते हैं।
लूला सरकार के सामने शुरुआती आर्थिक चुनौतियों में वर्ष 2027 का बजट भी शामिल होगा। इसमें सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.5 प्रतिशत के बराबर प्राथमिक बजट अधिशेष हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्रीय बैंक के 19 अक्टूबर को जारी साप्ताहिक फोकस सर्वेक्षण में वर्ष 2026 के लिए महंगाई दर 5.22 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। यह निर्धारित 4.5 प्रतिशत की ऊपरी सीमा से अधिक है। सर्वेक्षण में साल के अंत तक सेलिक बेंचमार्क ब्याज दर 13.25 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई थी।
द रियो टाइम्स के लैटिन अमेरिका पावर इंडेक्स के अनुसार, ब्राजील का सार्वजनिक कर्ज उसकी जीडीपी के करीब 93 प्रतिशत के बराबर है। ऐसे में आर्थिक प्रबंधन भी लूला सरकार के लिए अहम मुद्दा रहेगा।
भारत के लिए लूला की जीत क्यों है महत्वपूर्ण?
लूला की दोबारा जीत से भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक एवं आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। इस साल दोनों देशों के रिश्तों में उल्लेखनीय तेजी आई है। फरवरी में लूला भारत की राजकीय यात्रा पर आए थे और उन्होंने एआई इम्पैक्ट समिट में भी भाग लिया था।
21 फरवरी को हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लूला के बीच बैठक हुई थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार करने पर जोर दिया था।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, लूला की फरवरी यात्रा के दौरान सहयोग से जुड़े दस प्रमुख परिणाम सामने आए थे। इनमें महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ मृदा तत्वों पर समझौता, डिजिटल तकनीक, इस्पात आपूर्ति शृंखला के लिए खनन, स्वास्थ्य नियमन, छोटे कारोबार और डाक क्षेत्र में सहयोग जैसे विषय शामिल थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि दोनों देश अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर से काफी आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वहीं, लूला ने व्यापार का लक्ष्य बढ़ाकर 30 अरब डॉलर करने की बात कही थी। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को कम से कम दोगुना करके 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर सहमति जताई थी।
ब्राजील के साथ बढ़ा व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों पर भी जोर
भारत और ब्राजील के बीच व्यापार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 15 अरब डॉलर से अधिक रहा, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत ज्यादा था। इससे भारत ब्राजील के निर्यात के लिए उसका दसवां सबसे बड़ा बाजार बन गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 15.07 अरब डॉलर रहा।
महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग भी दोनों देशों की साझेदारी का अहम हिस्सा है। ब्राजील के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दुर्लभ मृदा भंडार है, लेकिन वर्ष 2025 में वैश्विक खनन उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी एक प्रतिशत से भी कम थी।
भारत चीन से होने वाली आपूर्ति पर निर्भरता कम करने के लिए विकल्प तलाश रहा है। ऐसे में ब्राजील की नीतियां और इस क्षेत्र में उसकी भूमिका भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका की भी दुर्लभ मृदा तत्वों के क्षेत्र में दिलचस्पी है।
फ्लावियो बोल्सोनारो ने मार्च में टेक्सास में आयोजित एक रूढ़िवादी सम्मेलन के दौरान कहा था कि ब्राजील दुर्लभ मृदा तत्वों के मामले में चीन पर अमेरिका की निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है।
लूला की जीत के बाद भारत और ब्राजील के बीच पहले से तय सहयोग की रूपरेखा आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। इससे दोनों देशों को व्यापार, रणनीतिक संबंधों और महत्वपूर्ण खनिजों सहित विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
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