मद्रास हाईकोर्ट ने छह विधायकों के इस्तीफे को माना वैध, स्पीकर का आदेश बरकरार

HIGHLIGHTS
- विधायकों के इस्तीफे 26 मई से 29 जून 2026 के बीच मंजूर किए गए थे।
- अदालत ने अयोग्यता की कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी।
- याचिकाकर्ताओं ने उचित जांच के बिना इस्तीफे स्वीकार करने का आरोप लगाया।
मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को AIADMK के छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के मामले में सुनवाई की। अदालत ने तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उन्होंने पार्टी के छह विधायकों के इस्तीफे मंजूर किए थे। ये सभी विधायक तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) में शामिल हो गए थे। इनमें मरागथम कुमारवेल, सत्यभामा, इसाक्की सुब्बैया, जयकुमार, एमआर विजयभास्कर और सी विजयभास्कर शामिल हैं।
मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने AIADMK के व्हिप एग्री एसएस कृष्णमूर्ति की ओर से विधानसभा अध्यक्ष के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को आंशिक रूप से स्वीकार किया। इन विधायकों के इस्तीफे 26 मई से 29 जून 2026 के बीच स्वीकार किए गए थे।
खंडपीठ ने क्या फैसला सुनाया?
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने माना कि विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करने का फैसला संवैधानिक रूप से वैध था और इसके लिए विस्तृत जांच की जरूरत नहीं थी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि छह विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही जारी रह सकती है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही लंबित होने के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने उचित जांच किए बिना उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए। अयोग्यता की याचिका में आरोप लगाया गया था कि छह विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) सरकार के समर्थन में मतदान किया था।
इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने छह विधायकों के इस्तीफे स्वीकार किए थे। इस फैसले को रद्द कराने के लिए AIADMK के व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति और नेशनल पीपुल्स पावर पार्टी के नेता रवि ने अदालत में याचिकाएं दाखिल की थीं।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफों पर कोई सार्थक जांच नहीं की। उन्होंने राज्यपाल को विधायकों की खरीद-फरोख्त के संबंध में की गई शिकायत का भी हवाला दिया था। इन मामलों की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने की।
बागी विधायकों ने क्या तर्क दिया?
दूसरी ओर, इस्तीफा देने वाले विधायकों ने दलील दी कि इस्तीफा देना और किसी दूसरी पार्टी में शामिल होना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा है। वहीं, विधानसभा सचिव की ओर से कहा गया कि यदि विधायक स्वेच्छा से इस्तीफा देते हैं, तो अध्यक्ष उसे स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकते।
इस मामले के बीच AIADMK की पूर्व विधायक मरागथम कुमारवेल, जो मदुरंथकम सीट से विधायक थीं, और पी. सत्यभामा, जो धरपुरम सीट का प्रतिनिधित्व करती थीं, के इस्तीफे के बाद दोनों विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हुए। दोनों ने जोसेफ विजय की पार्टी TVK में शामिल होने के लिए इस्तीफा दिया था।
चुनाव आयोग के अनुसार, TVK उम्मीदवार पी. सत्यभामा ने धरपुरम विधानसभा उपचुनाव में 66,841 वोटों से जीत दर्ज की। वहीं, मदुरंथकम सीट पर TVK उम्मीदवार के. मरागथम कुमारवेल विजयी हुईं। दोनों उम्मीदवारों ने TVK के सीटी चुनाव चिह्न पर दोबारा चुनाव लड़ा और DMK तथा AIADMK के विरोधी उम्मीदवारों को बड़े अंतर से हराकर अपनी सीटें बरकरार रखीं।
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