मेरठ का वीर सपूत शहीद: सेना के नायक ज्ञानेश्वर ने इलाज के दौरान गंवाई जान

HIGHLIGHTS
- मेरठ के रछौती गांव निवासी सेना के नायक ज्ञानेश्वर हिमाचल प्रदेश में गश्त के दौरान हुए हादसे में घायल होने के बाद शहीद हो गए।
- कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात ज्ञानेश्वर वर्ष 2014 में सेना में भर्ती हुए थे और दो साल पहले नायक पद पर पदोन्नत हुए थे।
- शहादत की खबर से गांव में शोक की लहर है, उनका पार्थिव शरीर राजकीय सम्मान के साथ पैतृक गांव पहुंचाया जाएगा।
मेरठ। देश की रक्षा में तैनात मेरठ के एक और वीर जवान ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट में नायक के पद पर कार्यरत ज्ञानेश्वर हिमाचल प्रदेश में गश्त के दौरान हुए हादसे में घायल हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शहादत की खबर मिलते ही उनके पैतृक गांव रछौती और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।
गश्त के दौरान वाहन हादसे में हुए थे घायल
जानकारी के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले हिमाचल प्रदेश के शिमला क्षेत्र में सेना के सरकारी वाहन से गश्त करते समय हादसा हो गया था। इस दुर्घटना में नायक ज्ञानेश्वर गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ले ली।
2014 में सेना में हुए थे भर्ती
नायक ज्ञानेश्वर वर्ष 2014 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। अपनी मेहनत, कर्तव्यनिष्ठा और बेहतर सेवाओं के चलते उन्हें दो साल पहले पदोन्नति देकर नायक बनाया गया था। वह कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात रहकर देश की सुरक्षा में योगदान दे रहे थे।
परिवार को बेटे की वीरता पर गर्व
ज्ञानेश्वर अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके छोटे भाई प्रदीप भी भारतीय सेना में सिपाही के पद पर तैनात हैं और देश सेवा कर रहे हैं।
जवान की शहादत की सूचना मिलते ही परिवार में दुख का माहौल छा गया। वहीं, गांव के लोगों और क्षेत्रवासियों ने वीर जवान को श्रद्धांजलि दी। परिजनों ने गम के बीच अपने बेटे की देश सेवा और बलिदान पर गर्व जताया।
राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
बताया जा रहा है कि शहीद नायक ज्ञानेश्वर का पार्थिव शरीर शाम करीब सात बजे उनके पैतृक गांव रछौती पहुंच सकता है। गांव में उनके अंतिम दर्शन और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं।
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