मुजफ्फरनगर: दवा लेने निकले पिता और दो बेटे, नीलगाय से टकराई स्कूटी; पांच दिन में तीनों की मौत

HIGHLIGHTS
- अशफाक का पांच दिनों तक डिवाइन अस्पताल में इलाज चला।
- नाहिद के पीछे दो बेटियां और एक बेटा रह गए हैं।
- परिवार पहले से आर्थिक तंगी के बीच किराए के मकान में रह रहा था।
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में हुए एक सड़क हादसे ने मल्हूपुरा के एक गरीब परिवार की जिंदगी बदलकर रख दी। बीमार पिता को दवा दिलाने जा रहे बुजुर्ग और उनके दो बेटे स्कूटी की नीलगाय से टक्कर होने के बाद घायल हो गए। इसके बाद महज पांच दिनों के भीतर तीनों की इलाज के दौरान मौत हो गई।
पहले एक बेटे ने दम तोड़ा, फिर दूसरे बेटे की मौत हुई और आखिर में बुजुर्ग पिता भी नहीं बच सके। परिवार पहले से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और किराए के मकान में रह रहा था। अब तीन मौतों के बाद परिवार में पीछे रह गए बच्चों और परिजनों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों के साथ भविष्य का संकट भी खड़ा हो गया है।
दवा लेने जा रहे थे, नीलगाय से हुई टक्कर
थाना सिविल लाइन क्षेत्र के मल्हूपुरा निवासी करीब 80 वर्षीय अशफाक अपने बेटों मोहम्मद नाहिद (38) और मोहम्मद साजिद (35) के साथ 29 अगस्त की सुबह स्कूटी से चरथावल दवा लेने जा रहे थे। बताया गया कि दधेडू पार करने के बाद रजवाहे की पुलिया के पास अचानक जंगल की ओर से नीलगाय सड़क पर आ गई। नीलगाय से स्कूटी की जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में अशफाक और उनके दोनों बेटे गंभीर रूप से घायल हो गए।
साजिद ने 30 अगस्त को दम तोड़ा
हादसे की जानकारी मिलने पर चरथावल पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से तीनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद मोहम्मद साजिद की हालत गंभीर होने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। परिजन उन्हें मेरठ के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां 30 अगस्त को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
बेटे की मौत के दो दिन बाद नाहिद भी नहीं बच सके
परिवार एक बेटे की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि 1 सितंबर को दूसरे बेटे मोहम्मद नाहिद ने भी मुजफ्फरनगर के निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। नाहिद अपने पीछे दो बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। उनकी सबसे छोटी बेटी महज डेढ़ साल की है। पिता की मौत के बाद तीनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
पांच दिन तक जिंदगी से जूझते रहे बुजुर्ग पिता
हादसे में घायल अशफाक भी पांच दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे। रुड़की रोड स्थित डिवाइन अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। 2 सितंबर की रात उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस तरह एक ही सड़क हादसे में पांच दिनों के भीतर बुजुर्ग पिता और उनके दोनों बेटों की मौत हो गई।
किराए के मकान में रहता है परिवार, अब बच्चों के भविष्य की चिंता
परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर बताई जा रही है। परिजन मल्हूपुरा में किराए के मकान में रहकर गुजारा कर रहे थे। अब परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद बच्चों की परवरिश और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने का संकट सामने है।
वार्ड नंबर-7 के सभासद मोहम्मद खालिद ने बताया कि परिवार बेहद गरीब है। उन्होंने डीएम, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है।
सपा सांसद हरेंद्र मलिक भी पहुंचे
मोहम्मद साजिद की मौत के बाद मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के सपा सांसद हरेंद्र मलिक भी पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे। उन्होंने परिजनों से मुलाकात कर दुख साझा किया और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। सांसद ने कहा कि प्रशासनिक स्तर से परिवार को जो भी सहायता मिल सकती है, उसे दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
एक हादसे ने छीन लिया परिवार का सहारा
नीलगाय से हुई टक्कर ने परिवार से उसके तीन सदस्य और कमाई का सहारा छीन लिया। पांच दिनों के भीतर पिता और दोनों बेटों की मौत के बाद अब पीछे रह गए छोटे बच्चों और अन्य परिजनों के सामने जिंदगी को दोबारा संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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