शाहपुर BDO से जुड़े वायरल वीडियो पर प्रशासन सख्त, दो सदस्यीय जांच समिति गठित

HIGHLIGHTS
- वायरल वीडियो में मनरेगा कार्यों से जुड़े कथित कमीशनखोरी के आरोप लगाए गए हैं।
- CDO कमल किशोर कंडारकर ने दो सदस्यीय संयुक्त जांच समिति बनाई है।
- उपायुक्त स्वतः रोजगार केएन पांडेय को जांच समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के शाहपुर विकासखंड के तत्कालीन BDO परशुराम राम से जुड़ा कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। वीडियो में मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों में कथित कमीशनखोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बुधवार को इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए।
CDO कमल किशोर कंडारकर ने वायरल वीडियो और उससे जुड़े पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए दो सदस्यीय संयुक्त जांच समिति गठित की है। समिति को मामले के सभी पहलुओं की जांच कर निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, उपायुक्त स्वतः रोजगार केएन पांडेय को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया को समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है।
जांच समिति सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की सत्यता की जांच करेगी। इसके साथ ही वीडियो से जुड़े तथ्यों, संबंधित अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों की भी पड़ताल की जाएगी। समिति वीडियो के तकनीकी और तथ्यात्मक पहलुओं की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी को सौंपेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तत्कालीन BDO जिला मुख्यालय से संबद्ध
प्रशासन ने जांच के साथ तत्काल कार्रवाई भी की है। DM के अनुमोदन के क्रम में बुधवार रात करीब 9 बजे शाहपुर के तत्कालीन खंड विकास अधिकारी परशुराम राम को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। जिला विकास अधिकारी दिग्विजय नाथ तिवारी की ओर से जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
अरविंद कुमार त्यागी को शाहपुर का अतिरिक्त प्रभार
शाहपुर विकासखंड का कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन ने BDO अरविंद कुमार त्यागी को शाहपुर विकासखंड का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। अब जांच समिति वायरल वीडियो, संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच करेगी।
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
वायरल वीडियो में मनरेगा कार्यों में कथित कमीशनखोरी से जुड़े आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, अभी वीडियो की सत्यता और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वीडियो में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही मामले में आगे प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई किए जाने का फैसला होगा।
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