मुजफ्फरनगर: 16 साल पुराने हत्याकांड में दो दोषियों को मिली फांसी की सजा

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर के 16 साल पुराने राजवीर सिंह हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 ने दो दोषियों सहदेव उर्फ पप्पू और प्रमोद को फांसी की सजा सुनाई है।
- यह मामला 2010 के ग्राम प्रधान चुनाव से जुड़ी रंजिश में हुई हत्या का है, जिसमें राजवीर सिंह को गोली मारकर मौत के घाट उतारा गया था।
- अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी मानते हुए एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है, जबकि पीड़ित परिवार ने फैसले का स्वागत किया है।
मुजफ्फरनगर में वर्ष 2010 के चर्चित राजवीर सिंह हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दो मुख्य आरोपियों सहदेव उर्फ पप्पू और प्रमोद को फांसी की सजा सुनाई है। जिला न्यायाधीश रवि दिवाकर की अदालत ने दोनों को दोषी करार देते हुए एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला तितावी थाना क्षेत्र के माड़ी गांव में हुए ग्राम प्रधान चुनाव की रंजिश से जुड़ा हुआ है, जहां चुनावी विवाद के चलते राजवीर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

चुनावी रंजिश में हुई थी हत्या
साल 2010 में ग्राम प्रधान चुनाव को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया था। आरोप है कि राजवीर सिंह, एक प्रत्याशी के समर्थक के रूप में काम कर रहे थे, जिन्हें रास्ते में घेरकर अंधाधुंध फायरिंग कर मौत के घाट उतार दिया गया था।
घटना के बाद पुलिस ने हत्या, साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था और जांच शुरू की थी।
दो आरोपी पहले ही पुलिस मुठभेड़ में मारे गए
जांच के दौरान दो आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। पुलिस के अनुसार, दोनों ने मुठभेड़ के दौरान फायरिंग की थी, जिसके जवाबी कार्रवाई में उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद शेष दो आरोपियों पर मुकदमा जारी रहा।

अदालत ने सबूतों के आधार पर सुनाया फैसला
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और बरामद हथियारों को आधार बनाते हुए दोनों आरोपियों को दोषी पाया। अदालत ने कहा कि यह हत्या पूरी तरह से पूर्व नियोजित थी और चुनावी रंजिश में की गई एक गंभीर आपराधिक घटना है।
16 साल बाद मिला न्याय
करीब 16 साल तक चले इस मामले में कई कानूनी प्रक्रियाओं और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद फैसला आया है। पीड़ित परिवार ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि लंबे इंतजार के बाद उन्हें न्याय मिला है।
गांव के लोगों ने भी इस फैसले पर संतोष जताया है, जबकि अदालत ने अपने आदेश में ऐसे अपराधों पर कड़ी सजा की जरूरत बताई है ताकि समाज में भय और कानून का सम्मान बना रहे।
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