मुजफ्फरनगर: संविदा लाइनमैन की मौत के बाद ग्रामीणों का प्रदर्शन, बिजलीघर के बाहर धरने पर बैठे लोग

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर में बिजली तार ठीक करने के दौरान संविदा लाइनमैन की करंट लगने से मौत।
- ग्रामीणों ने शटडाउन नहीं देने का आरोप लगाकर बिजली विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया।
- परिजन कार्रवाई, मुआवजे और दोषी कर्मचारियों पर मुकदमे की मांग कर रहे हैं।
मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र में बिजली विभाग की लापरवाही के आरोपों के बीच एक संविदा लाइनमैन की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा डिगानी विद्युत उपकेंद्र क्षेत्र में हुआ, जहां टूटे बिजली के तार ठीक करने के दौरान लाइनमैन खंभे पर चढ़ा था।
घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और मृतक के परिजनों ने बिजलीघर के बाहर सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई और परिवार को मुआवजा देने की मांग उठाई।
टूटे तार ठीक करने के दौरान हुआ हादसा
मृतक की पहचान करीब 38 वर्षीय दिगपाल के रूप में हुई है। वह पिछले करीब 15 वर्षों से डिगानी विद्युत उपकेंद्र में संविदा लाइनमैन के पद पर कार्यरत थे।
जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह गांव में बिजली के तार टूटने की शिकायत मिली थी। इसके बाद दिगपाल को मौके पर भेजा गया। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय उपकेंद्र पर कोई अन्य वरिष्ठ कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिसके चलते दिगपाल खुद ही मरम्मत कार्य के लिए पहुंच गए।
शटडाउन नहीं मिलने का लगाया आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि लाइन ठीक करने से पहले दिगपाल ने ड्यूटी पर तैनात एसएसओ संदीप कुमार से बिजली आपूर्ति बंद करने यानी शटडाउन की मांग की थी। आरोप है कि उन्हें शटडाउन नहीं दिया गया।
ग्रामीणों के मुताबिक, इसके बाद भी समस्या का समाधान करने के लिए दिगपाल बिजली के खंभे पर चढ़ गए। काम शुरू करते ही वह करंट की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलसकर नीचे गिर पड़े।
मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दिगपाल की मौत से उनके परिवार में मातम छा गया है। वह पत्नी सुशीला और तीन बच्चों के सहारे थे। उनके परिवार में 13 वर्षीय बेटी राधा, 11 वर्षीय बेटा देव आनंद और 7 वर्षीय बेटा आयुष हैं। हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
कार्रवाई और मुआवजे की मांग को लेकर धरना
घटना के बाद ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी समय पर मौके पर नहीं पहुंचे, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई। इसके बाद उन्होंने बिजलीघर के सामने शव रखकर धरना शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हादसे के पीछे लापरवाही जिम्मेदार है। ग्रामीणों का कहना है कि एसएसओ को शटडाउन देने की मांग की गई थी, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा देने की भी मांग रखी है। शाम तक परिजन और ग्रामीण बिजलीघर के बाहर धरने पर बैठे रहे और अधिकारियों के पहुंचने का इंतजार करते रहे।
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