NCERT की नई किताब में सावरकर की एंट्री, हिटलर वाला हिस्सा हटा; विभाजन पर कांग्रेस का रुख भी बदला

HIGHLIGHTS
- NCERT ने कक्षा 8 सोशल साइंस की संशोधित किताब जारी की, जिसमें न्यायपालिका और इतिहास से जुड़े कई हिस्सों में बदलाव किए गए हैं।
- नई किताब में विभाजन के संदर्भ, सावरकर के स्वराज संबंधी उल्लेख और नेताजी बोस से जुड़े अध्यायों में संशोधन किया गया है।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद न्यायपालिका अध्याय को दोबारा तैयार किया गया, जबकि कुछ विवादित संदर्भ हटाए गए हैं।
नई दिल्ली। एनसीईआरटी (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की संशोधित पाठ्यपुस्तक "एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड" जारी कर दी है। न्यायपालिका से जुड़े एक अध्याय को लेकर उठे विवाद के बाद किताब में कई बदलाव किए गए हैं। संशोधित संस्करण में इतिहास और नागरिक शास्त्र के कुछ हिस्सों को दोबारा लिखा गया है।
नई किताब में 1947 के विभाजन को लेकर कांग्रेस की भूमिका से जुड़े अंशों में बदलाव किया गया है। संशोधित पाठ में कहा गया है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने विभाजन का व्यापक रूप से विरोध किया था और यह सवाल कि क्या देश का बंटवारा आगे बढ़ने का एकमात्र विकल्प था, अब भी बहस का विषय है।
न्यायपालिका अध्याय में किए गए बड़े बदलाव
किताब के चौथे अध्याय "समाज में न्यायपालिका की भूमिका" में भी संशोधन किया गया है। पहले के संस्करण में शामिल कुछ ऐसे अंश हटा दिए गए हैं, जिन पर न्यायपालिका की छवि प्रभावित करने का आरोप लगा था।
नई किताब में न्यायिक व्यवस्था को समझाने के लिए जनहित याचिका (PIL), ट्रिब्यूनल और वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) जैसे विषयों को शामिल किया गया है। वहीं, अदालतों में लंबित मामलों और कुछ न्यायिक फैसलों के संदर्भों को हटाया गया है।
सावरकर का उल्लेख शामिल, हिटलर और नाजी विचारधारा का संदर्भ हटाया
संशोधित इतिहास अध्याय में विनायक दामोदर सावरकर की स्वराज की मांग का उल्लेख जोड़ा गया है। वहीं, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़े हिस्सों में बदलाव किया गया है।
पुरानी किताब में बोस द्वारा ब्रिटिश शासन के खिलाफ समर्थन हासिल करने के लिए हिटलर से संपर्क करने और नाजी विचारधारा का जिक्र किया गया था। नए संस्करण में इन संदर्भों को हटाकर केवल इतना बताया गया है कि बोस ने ब्रिटिश विरोधी ताकतों से सहयोग मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हुआ संशोधन
न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को लेकर विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया था। इसके बाद पुरानी किताब की प्रतियों को वापस लेने और आगे के प्रकाशन पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे।
संशोधित संस्करण की भूमिका में बताया गया है कि पुस्तक को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और समीक्षा प्रक्रिया के बाद तैयार किया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने न्यायपालिका वाले अध्याय को दोबारा तैयार किया।
किताब की विकास टीम में भी बदलाव
पुराने संस्करण की पुस्तक विकास टीम में 51 सदस्य शामिल थे, जबकि संशोधित संस्करण में 48 सदस्यों के नाम हैं। तीन सदस्यों—मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार—के नाम नई सूची से हटा दिए गए हैं।
एनसीईआरटी का कहना है कि संशोधन छात्रों को विषयों की बेहतर और संतुलित समझ देने के उद्देश्य से किए गए हैं।
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