डिजिटल लाइब्रेरी टेंडर पर घमासान, राजभर ने CM योगी को लिखा पत्र; अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

HIGHLIGHTS
- डिजिटल लाइब्रेरी के टेंडर को लेकर पंचायती राज विभाग में विवाद।
- मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने CM योगी को पत्र भेजा।
- प्रमुख सचिव अनिल कुमार और निदेशक अमित कुमार सिंह पर आरोप।
यूपी। पंचायती राज विभाग में डिजिटल लाइब्रेरी के टेंडर को लेकर चल रहा विवाद अब सामने आ गया है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार और निदेशक अमित कुमार सिंह के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। पत्र में भ्रष्टाचार के साथ-साथ काम में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं।
पंचायती राज विभाग की ओर से डिजिटल लाइब्रेरी योजना पर काम किया जा रहा है। इसके पहले चरण में 11 हजार ग्राम पंचायतों में लाइब्रेरी स्थापित करने की जिम्मेदारी यूपीडेस्को को दी गई है। वहीं, दूसरे चरण में 11,350 और ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जानी हैं। एक लाइब्रेरी की लागत 4 लाख रुपये निर्धारित है।
बताया जा रहा है कि दूसरे चरण की डिजिटल लाइब्रेरी के टेंडर को लेकर मंत्री और अधिकारियों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अधिकारियों ने फाइल मुख्य सचिव के माध्यम से उच्चस्तर पर भेज दी और वहां से निर्णय कराया गया। बताया जा रहा है कि यह फैसला मंत्री की इच्छा के अनुरूप नहीं था। इसके बाद पंचायती राज मंत्री ने प्रमुख सचिव और निदेशक के खिलाफ मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।
ओमप्रकाश राजभर ने लगाए ये आरोप
ओमप्रकाश राजभर ने अमर उजाला को बताया कि उन्होंने प्रमुख सचिव और निदेशक के खिलाफ मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। उनका आरोप है कि उच्चस्तर पर तय किए गए फैसलों को भी विभाग में लागू नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में फीकल स्लज ट्रीटमेंट यानी मल के निस्तारण की परियोजना के काम में काफी लापरवाही बरती जा रही है। एक ओर पहले चरण की डिजिटल लाइब्रेरी का काम पूरा होने की रिपोर्ट उच्चस्तर पर भेजी गई है, वहीं दूसरी ओर इसी मामले में 16 डीपीआरओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा गया है। उन्होंने गलत रिपोर्ट भेजे जाने का भी आरोप लगाया।
राजभर ने आरोप लगाया कि योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए मिली राशि को भी अधिकारियों ने मिलकर हड़प लिया।
ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि चुनाव सिर पर है और पहले चरण की डिजिटल लाइब्रेरी का काम भी अभी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने काम जल्द पूरा करने के लिए जरूर कहा था, लेकिन किसी खास एजेंसी के चयन को लेकर कभी कोई निर्देश नहीं दिया। उन्होंने पूरी स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए पत्र लिखा है। साथ ही मौखिक रूप से प्रमुख सचिव और निदेशक को हटाने के लिए भी कहा है।
इस मामले में प्रमुख सचिव अनिल कुमार का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
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