AQI बढ़ने से बढ़ सकता है स्ट्रोक का जोखिम, 35-45 साल के लोगों पर भी खतरा

HIGHLIGHTS
- डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषण और तनाव स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
- 35 से 45 वर्ष की उम्र के युवा भी स्ट्रोक की चपेट में आ रहे हैं।
- पीएम 2.5 के महीन कण रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बढ़ने के साथ स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषण, तनाव और लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने जैसी आदतें स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा रही हैं और इसे साइलेंट किलर बना रही हैं।
पुष्पावती सिंघानिया हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (PSRI) के न्यूरोसर्जन एवं निदेशक डॉ. अमिताभ गुप्ता के अनुसार, प्रदूषण के मौसम में अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ने लगती है। इसकी चपेट में 35 से 45 वर्ष की उम्र के युवा भी आ रहे हैं।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट-न्यूरोलॉजी और स्ट्रोक विशेषज्ञ डॉ. विनीत सूरी के मुताबिक, प्रदूषण, मानसिक तनाव और लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि से दूर रहना स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।
प्रदूषण से कैसे बढ़ता है स्ट्रोक का खतरा?
डिस्कवर पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित दिल्ली-शिमला के एक अध्ययन में 2021 से लेकर 2025 के मध्य तक अस्पताल में भर्ती 41,436 मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें दिल्ली में हृदय रोग के 11,494 मामले शामिल थे।
अध्ययन के अनुसार, दिल्ली के AQI में हर 10 अंक की बढ़ोतरी के साथ एक दिन के भीतर हृदय रोग की घटनाओं में 1.8 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, पीएम 2.5 में 10 यूनिट की बढ़ोतरी के साथ यह वृद्धि दो प्रतिशत रही।
प्रदूषण के कण प्लेटलेट्स को अधिक चिपचिपा बना सकते हैं, जिससे रक्त वाहिकाओं में खून के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनों में पीएम 2.5 के स्तर में बढ़ोतरी के साथ हार्ट अटैक के जोखिम में दो प्रतिशत और स्ट्रोक के जोखिम में एक प्रतिशत वृद्धि का संबंध पाया गया है।
लंबे समय तक बैठना और तनाव भी बढ़ाते हैं जोखिम
डॉ. विनीत सूरी के अनुसार, पीएम 2.5 के महीन कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर सूजन बढ़ाते हैं और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने और खून के थक्के बनने की आशंका बढ़ जाती है।
ऐसी स्थिति में मस्तिष्क की रक्त वाहिका में रुकावट आने या उसके फटने से स्ट्रोक हो सकता है।
स्ट्रोक के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
डॉ. विनीत सूरी के मुताबिक, अचानक शरीर का संतुलन बिगड़ना, धुंधला दिखाई देना, चेहरे का एक तरफ लटक जाना, हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन और बोलने में परेशानी स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं।
डॉ. अमिताभ गुप्ता के अनुसार, लक्षण शुरू होने के बाद शुरुआती साढ़े चार घंटे इलाज के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना चाहिए।
स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?
डॉ. सूरी के अनुसार, प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर सुबह की सैर से बचना चाहिए। बाहर निकलते समय एन-95 मास्क पहनने की सलाह दी गई है।
इसके अलावा, हर 30 से 40 मिनट में अपनी जगह से उठकर दो से तीन मिनट टहलना चाहिए। रोजाना सात से आठ घंटे की नींद लें और ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर तथा कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं। धूम्रपान से दूर रहें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
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