मोगा में बिजली संकट को लेकर किसानों का प्रदर्शन, कई जगह सड़कें जाम

HIGHLIGHTS
- बिजली विभाग के आश्वासन के बावजूद सप्लाई में सुधार नहीं होने पर किसान दोबारा सड़कों पर उतरे।
- बाघापुराना, निहाल सिंह वाला, अजीतवाल, कडियाल और समालसर में प्रदर्शन हुआ।
- किसानों ने धान की फसल के लिए लगातार आठ घंटे निर्बाध बिजली देने की मांग रखी।
मोगा। खेतों के लिए पर्याप्त बिजली सप्लाई नहीं मिलने के विरोध में शनिवार को मोगा जिले में अलग-अलग किसान यूनियनों ने कई जगहों पर धरना प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए प्रमुख मार्गों और हाईवे पर यातायात रोक दिया।
बाघापुराना के मुख्य चौक में किसानों ने धरना देकर सड़क पर आवाजाही बंद कर दी। निहाल सिंह वाला के मुख्य चौक में भी किसानों ने प्रदर्शन करते हुए मार्ग जाम किया। वहीं अजीतवाल में पावर ग्रिड के पास फिरोजपुर-लुधियाना रोड पर किसानों ने धरना देकर रास्ता बंद कर दिया। धर्मकोट क्षेत्र के कडियाल में पावर ग्रिड के बाहर भी किसानों ने बिजली की मांग को लेकर रोष प्रदर्शन किया।
इसके अलावा समालसर के पास मोगा-कोटकपूरा रोड पर भी किसानों ने धरना दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। मोगा में बिजली कटों के कारण किसान और आम लोग परेशान हैं। इससे पहले शुक्रवार को भी कई स्थानों पर किसानों ने बिजली की मांग को लेकर सड़क जाम की थी। बिजली विभाग के अधिकारियों ने दो दिन में समस्या का समाधान करने का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद नाराज किसान शनिवार को फिर सड़कों पर उतर आए।
किसानों का कहना है कि इस समय धान की फसल के लिए पानी की बहुत जरूरत है, लेकिन खेतों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। कभी बिजली आती है तो कभी कट लग जाता है। ऐसे में धान की फसल को समय पर पानी देना किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है।
किसानों ने कहा कि सरकार खेतों को आठ घंटे बिजली सप्लाई देने के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्थिति अलग है। किसानों को लगातार बिजली कटों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर उनकी फसल पर पड़ रहा है।
धरने पर बैठे किसानों की मुख्य मांग है कि खेतों के लिए लगातार आठ घंटे निर्बाध बिजली सप्लाई सुनिश्चित की जाए, जिससे धान की फसल को समय पर पानी मिल सके और किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
किसानों का कहना है कि अधिकारी बार-बार आश्वासन देकर उनका धरना खत्म करवाते रहे हैं, लेकिन अब पर्याप्त बिजली नहीं मिलने की स्थिति में वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।
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