सब्जियों के बढ़ते दाम से बिगड़ा रसोई का बजट, दुकानदारों की बिक्री भी प्रभावित

HIGHLIGHTS
- फुटकर बाजार में कई सब्जियों के भाव काफी बढ़ गए हैं।
- मटर की कीमत करीब 200 रुपये किलो तक पहुंची।
- अदरक 200 रुपये से अधिक में बिक रहा है।
सब्जियों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आम आदमी की रसोई का बजट प्रभावित हुआ है। वहीं, महंगाई का असर सब्जी कारोबारियों के कामकाज पर भी दिखाई देने लगा है। बढ़े हुए दामों के चलते ग्राहक पहले के मुकाबले कम मात्रा में सब्जियां खरीद रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार, जो ग्राहक पहले दो किलो टमाटर या कई किलो दूसरी सब्जियां लेते थे, वे अब आधा किलो या ढाई सौ ग्राम में ही काम चला रहे हैं। इसका सीधा असर उनकी बिक्री और कमाई पर पड़ रहा है।
मटर 200 तो टमाटर 90 रुपये किलो
फुटकर बाजार में मटर की कीमत करीब 200 रुपये किलो तक पहुंच गई है। अदरक 200 रुपये से ज्यादा, फूलगोभी 100, टमाटर 90, भिंडी 70, प्याज 60 और बीन्स 80 रुपये किलो तक बिक रही है। नींबू के दाम भी 80 रुपये किलो से ऊपर पहुंच गए हैं। महंगाई के कारण ग्राहक अपनी जरूरत के मुताबिक ही सब्जियां खरीद रहे हैं।
आधा रह गया मुनाफा
सब्जी विक्रेता मोहित ने बताया कि मंडियों में सब्जियों की आवक जारी है, लेकिन उन्हें शुरुआत से ही महंगे दाम पर माल मिल रहा है। महंगी सब्जियां खरीदने के बाद उन्हें ऊंचे दाम पर बेचना पड़ता है, जिसकी वजह से ग्राहक कम मात्रा में खरीदारी करते हैं। उनके मुताबिक, पहले दुकान से करीब 10 हजार रुपये तक का मुनाफा हो जाता था, लेकिन अब यह घटकर लगभग पांच हजार रुपये रह गया है।
समय पर बिक्री न होने से खराब हो जाती है सब्जी
दुकानदारों के मुताबिक कम बिक्री के साथ सब्जियों के खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। कई बार ग्राहक कम मात्रा में सब्जी खरीदते हैं और बचा हुआ माल समय पर नहीं बिक पाता। सब्जी खराब होने पर दुकानदारों को सीधे नुकसान उठाना पड़ता है।
टमाटर 30 रुपये से बढ़कर 90 रुपये तक पहुंचा
कुछ समय पहले तक टमाटर करीब 30 रुपये किलो मिल रहा था, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर 90 रुपये किलो तक पहुंच गई है। प्याज के दाम भी 30 रुपये से बढ़कर करीब 60 रुपये किलो हो गए हैं। फूलगोभी की कीमत 30-40 रुपये से बढ़कर 100 रुपये किलो तक पहुंच गई है। वहीं, शिमला मिर्च 55, गाजर 50 और करेला 60 रुपये किलो तक बिक रहा है।
ग्राहक बोले- खरीदारी कम करनी पड़ रही
सब्जी खरीदने पहुंचे महेश और राहुल ने बताया कि पेट्रोल-डीजल, गैस और रोजमर्रा की जरूरतों पर पहले से ही खर्च बढ़ा हुआ है। अब सब्जियों की कीमतें बढ़ने से रसोई का बजट और प्रभावित हो गया है। महंगे दामों की वजह से पहले की तरह ज्यादा मात्रा में सब्जियां खरीदना संभव नहीं हो पा रहा है। अब जरूरत के अनुसार सब्जी खरीदकर ही काम चलाना पड़ रहा है।
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