संगम स्नान बना आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक: सीएम योगी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में एकादशी के अवसर पर त्रिवेणी संगम में हुए पावन स्नान को आस्था और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि संगम की दिव्य धारा में एक ही दिन में 85 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान कर पुण्य अर्जित किया, जो सनातन परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति है। मुख्यमंत्री ने संगम स्नान के लिए पहुंचे संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कामना की कि गंगा, यमुना और सरस्वती की कृपा सभी पर बनी रहे।
मुख्यमंत्री ने मकर संक्रांति और खिचड़ी पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि कहीं यह पोंगल, कहीं बिहू, लोहड़ी, उत्तरायण या खिचड़ी पर्व के रूप में मनाया जाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता में निहित एकता को दर्शाता है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मकर संक्रांति पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण होने को शुभ परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है। यह समय सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत और आत्मिक जागरण का संदेश देता है। भारतीय परंपरा में इसे प्रकाश की ओर बढ़ने और कर्मशील जीवन अपनाने का संकेत माना गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि माघ मास के दौरान प्रयागराज में आयोजित माघ मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु संगम में स्नान करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य जनपदों में भी पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रहेगा, जिससे सामाजिक समरसता और सेवा भाव को बल मिलता है।
अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे मकर संक्रांति और खिचड़ी पर्व को पारंपरिक श्रद्धा, सौहार्द और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाएं तथा प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त बनाने में सहभागी बनें।
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