शंकराचार्य या दंगाई

प्रयागराज में संगम तट पर कथित शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने रथयात्रा निकाल कर और चेले चपाटों को एकत्र करा माघ मेला में बवाल खड़ा करने तथा बड़ी दुर्घटना कराने का कुचक्र रचा, यह ख़बर तो पुरानी हो गई है। तभी ख़बर यह कि अविमुक्तेश्वरानंद अब मेला प्रशासन, पुलिस व सरकार के विरुद्ध हिन्दू धर्म को आधार बना लोगों को भड़काने में लगे हैं। पुलिस से धक्कामुक्की कर भगदड़ या अव्यवस्था फैलाने में विफल होने के बाद अब महाराज कह रहे है कि शासन-प्रशासन ने सनातन का अपमान किया है, इसको हिन्दू समाज दंडित करे।
जबरदस्ती शंकराचार्य बने इस शख्स के लिए क्या किया जाए, क्या कहा जाए। किसी इस्लामी मुल्क या ईसाई देश में होता तो इनका इलाज कभी का हो गया होता। भारत में अराजकता, विद्रोह, गृहयुद्ध फैलाने के लिए अनेक लोग जुटे हुए हैं। उन्हीं में से ये एक हैं। मोदी योगी राज में इन सबको बक्शीश है किन्तु जनमानस तो सबकी असलियत जानता है।
ए.आर रहमान भी..
भारतीय फिल्म और संगीत की दुनिया में नौशाद, रफी, सलमान आमिर व शाहरूख, सैफ अली खान से लेकर वहीदा रहमान, शबाना आजमी न जाने कितने कलाकारों-संगीतकारों ने अपना मुकाम बनाया, करोड़ों नहीं अरबों रुपये कमाये, मौज उड़ाई फिर भी शबाना को शिकायत किं मुस्लिम होने के कारण हिन्दू कॉलोनी में घर नहीं मिलता, नसीरुद्दीन को भी भारत नहीं भाता क्योंकि यह मुल्क मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सेक्यूलर नहीं रहा। अब ए.आर. रहमान कहकर मुकर रहे हैं। अब भारत उनके दिल में बसने लगा है। यह कैसी सोच है। 10 बरस तक उप राष्ट्रपति रह कर हामिद अंसारी बोले- भारत रहने लायक नहीं। क्या इन सबका डीएनए एक ही है?
इमरान मसूद 1000 बोटी करने का जुमला बोलने के बाद ओवैसी बनना चाह रहे हैं? कहते हैं ए.आर रहमान भी परेशान हैं। मोदी ने देश की क्या गत बना दी। रामायण, महाभारत के संवाद लिखने वाले राही मासूम रज़ा को किसने कुछ कहा। हलाला के चक्कर से परेशान मीना कुमारी (महज़बीं बानो) शराब पी कर मर गई, कमाल अमरोही को किसी ने कुछ नहीं कहा।
भारत में इन सब की खपत है क्योंकि बड़े बुजुर्ग नकली सेक्युलरवाद स्थापित कर गए हैं।
गोविंद वर्मा
(संपादक 'देहात')
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.