तहसील कर्मियों की चोरी और सीनाजोरी !

HIGHLIGHTS
- विजिलेंस टीम ने सितारगंज तहसील के संग्रह अमीन मदनलाल शर्मा और सहायक लेखाकार भूपेंद्र सिंह राणा को 14 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले की सितारगंज तहसील में 30 जुलाई को एक हैरतअंगेज घटना घटी जो दर्शाती है कि रिश्वतखोर सरकारी अमले का दुस्साहस कितना बढ़ा हुआ है।
एक व्यक्ति ने विजिलेंस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी से शिकायत की कि तहसील के कर्मचारी किसी जायज काम के लिए रिश्वत मांग रहे हैं। शिकायत को सही मानते हुए विजिलेंस टीम को सितारगंज भेजा गया। टीम ने संग्रह अमीन मदनलाल शर्मा और सहायक लेखाकार भूपेंद्र सिंह राणा को 14 हजार रूपये रिश्वत लेते तहसील परिसर में दबोच लिया। राजस्व विभाग के दोनों रिश्वतखोर कर्मचारियों की गिरफ्तारी होते देख तहसील कर्मचारियों ने विजिलेंस टीम को घेर कर रिश्वती संग्रह अमीन और सहायक लेखा परीक्षक को छुड़ा लिया। इतना ही नहीं, विजिलेंस टीम के सदस्यों को तहसील की हवालात में बंधक बना लिया। विजिलेंस टीम 21 घंटे तक हवालात में बंद रही। अन्ततः यह फैसला हुआ कि तहसील के रिश्वती कर्मचारियों के विरुद्ध गिरफ्तारी की कार्यवाही नहीं होगी।
मज़े की बात यह है कि जिला अधिकारी उधम सिंह नगर नितिन सिंह भदौरिया ने तहसील के उद्दंड कर्मचारियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की बल्कि मामला कमिश्नर को जांच के लिए रैफर कर दिया।
अखबारों में हवालात के सीकचों में बंद विजिलेंस टीम के सदस्यों के चित्र छपे हैं। तहसीलदार से लेकर डीएम तक इस गंभीर मामले को रफा-दफा करने में लगे हैं। एक ओर उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति है। रिश्वतखोरों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है दूसरी ओर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री इस गंभीर घटना पर मौन हैं। रिश्वतखोर चोरी और सीनाजोरी पर उतारू हैं। यह घटना धामी सरकार के कुशासन की ओर संकेत करती है।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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