गोमूत्र और प्रियंका की मुस्कुराहट !

HIGHLIGHTS
- लोकसभा में प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद गोमूत्र और वैज्ञानिक शोध पर छिड़ी बहस।
- लेख में आईआईटी मद्रास के निदेशक डॉ. कामकोटि के शोध का उल्लेख।
दोनों भाई-बहन मौके के अनुसार नौटंकी करने में माहिर हैं। कभी मुस्कुराना, कभी माथे पर तेवड़ी डालने में निपुण हैं। 28 जुलाई को लोकसभा में मोदी सरकार द्वारा नकल रोकने व शिक्षा में सुधार के लिए बनाई गई टास्क फोर्स को बेकार बताते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि जिस कमेटी में गोमूत्र पर रिसर्च करने वाला शख्स मौजूद हो, वह टास्क फोर्स शिक्षा में सुधार कैसे ला पायेगी। प्रियंका ने सदन में हंसते हुए मद्रास आईआईटी निदेशक डॉ. कामकोटि पर सीधा कटाक्ष किया। गौर तलब है कि डॉ. कामकोटि ने देसी गाय पर रिसर्च करने के बाद एक बयान में कहा था कि विदेशी गायों के मुकाबले देसी गाय बहुत उपयोगी है। उन्होंने देसी गाय के पंचगव्य की विशेषतायें बता कर देसी गायों के संरक्षण एवं संवर्द्धन पर बल दिया। डॉ. कामकोटि ने कहा कि देसी गाय का मूत्र जीवाणुरोधक, कवकरोधी तथा पाचनतंत्र को व्यवस्थित करने के गुणों वाला है। गोमूत्र इरिटेबल बाउल सिंड्रोम बीमारी को ठीक करता है।
प्रियंका ने जब सदन में हंसते हुए डॉ. कामकोटि और मोदी सरकार का मजाक उड़ाया तो कांग्रेस सांसदों ने तालियां बजाकर उनके कथन का समर्थन किया। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने प्रियंका के कटाक्ष और डॉ. कामकोटि का विरोध करने पर कहा कि पूरा गांधी-नेहरू परिवार भारतीय संस्कृति का मज़ाक उड़ाने और अपमान करने में गर्व अनुभव करता है। डॉ. कामकोटि ने वैज्ञानिक अनुसंधान के पश्चात अपना निष्कर्ष निकाला है। यदि उनका भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान में विश्वास होता तो वे इस प्रकार गोमूत्र तथा डॉ. कामकोटि का मजाक न उड़ाती।
उल्लेखनीय है कि जब डॉ. कामकोटि का देसी गाय की उपयोगिता पर पेपर प्रकाशित हुआ तब राहुल-प्रियंका के इशारे पर तमिलनाडु कांग्रेस के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने डॉ. कामकोटि का जबरदस्त विरोध किया और उन्हें आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर पद से हटाने की मांग की। 19 जनवरी, 2025 को चेन्नई में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के पुत्र कीर्ति चिदंबरम ने डॉ. कामकोटि के विरुद्ध बयान जारी किया। सत्तारूढ़ डी.एम.के नेता टी.के.एस. एलंगोवन ने डॉ. कामकोटि के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी। टीपीडीके नेता के. रामकृष्णन ने भी धमकी दी थी। कांग्रेस सहित इन नेताओं ने गोमूत्र को एक विशेष सम्प्रदाय की भावनाओं से जोड़ वोट बैंक की राजनीति को पुष्ट किया।
भारतीय मनीषा में गाय का उच्च स्थान है, जिसका वैज्ञानिक आधार है। यह मातृत्व, दिव्यता तथा पवित्रता की प्रतीक है। भगवान श्रीराम के पूर्वज राजा दिलीप ने प्राण देकर भी शेर के मुंह से गाय को बचाने की पेशकश की थी। वेदों में गाय की महत्ता का बखान है। ऋग्वेद में गाय का 723 बार, यजुर्वेद में 87 बार, सामवेद में 170 बार और अथर्ववेद में 331 बार गाय का उल्लेख है। गाय के संबंध में श्लोक है।
भुक्त्वा तृणानि शुष्कानि पीत्वा तोयं जलाशयात्।
दुग्धं ददति लोकेभ्यो गावो विश्वस्य मातरः।।
अर्थात रूखे-सूखे घास के तिनके खाकर और जलाशय (तालाब) से जल पीकर संसार को दूध पिलाने वाली गाय विश्व की माता है। जिसके दूध से हम अपने शरीर को पुष्ट करते हैं।
वैज्ञानिक शोध के अनुसार गोमूत्र स्वास्थ्य सुधार, शरीर की शुद्धि, पौधों (फसल) की रक्षा में मददगार है। पेट की गैस, अपच और एसिडिटी कम करने में सहायक है। सोरायसिस, एक्जिमा, पुराने चर्म रोगों को ठीक करने में उपयोगी, रोग प्रतिरोधक है। जैविक खाद बनाने में उपयोगी। खेत में नाइट्रोजन तथा पोषक तत्वों को बढ़ाती है। उत्तम कीटनाशक है।
हरियाणा वासी, वर्तमान में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कुरुक्षेत्र में अपने 120 एकड़ के कृषि फार्म में गाय के गोमूत्र तथा गोबर से जीवामृत तैयार कर जीरो बजट खेती का फार्मूला ईजाद किया जिसका हजारों किसान लाभ उठा रहे हैं।
नेहरू-गांधी परिवार ने सदा से भारतीय संस्कृति का तिरस्कार किया है। सोनिया हो, प्रियंका हो या राहुल अपनी मनोवृत्ति को नहीं त्याग सकते। चाहे संसद में बोलें या सड़क पर, उन्हें भारतीयता पर कटाक्ष करना है।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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