राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, SIT से दो हफ्ते में मांगी जांच रिपोर्ट

HIGHLIGHTS
- राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SIT को दो हफ्ते में जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
- कोर्ट ने SIT में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का सुझाव दिया, जिस पर यूपी सरकार ने सहमति जताई।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए, पारदर्शिता के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
राम मंदिर ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में गठित एसआईटी को दो हफ्ते के भीतर जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की पुलिस जांच की निगरानी के लिए 25 जुलाई को एसआईटी का गठन किया गया था।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को सुझाव दिया कि मामले की जांच के लिए बनाई गई एसआईटी में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए। यूपी सरकार ने इस सुझाव पर सहमति जताई।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यूपी सरकार की ओर से अदालत को बताया कि पुलिस महानिरीक्षक किरण एस की अध्यक्षता में विशेष जांच समिति बनाई गई है। इस समिति में एक उप महानिरीक्षक, एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को शामिल किया गया है।
SIT में फॉरेंसिक ऑडिटर शामिल करने का निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा कि लोगों ने 500 रुपये और 1000 रुपये तक का दान दिया है, लेकिन कुछ राशि ट्रस्ट तक नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को प्राप्त राशि को वेबसाइट पर दिखाया जा सकता है, जिससे लोगों को जानकारी मिल सके कि उनका पैसा ट्रस्ट तक पहुंचा है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई की।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले को बंद नहीं किया जा रहा है और सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। उन्होंने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदमों पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जांच में वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे और एक फॉरेंसिक ऑडिटर भी शामिल होगा।
सीजेआई ने कहा कि फिलहाल अदालत का पूरा ध्यान जांच पर है। उन्होंने कहा कि जल्द और गुणवत्तापूर्ण जांच जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को दो हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। बाकी फैसले बाद में लिए जाएंगे।
पिछली सुनवाई में अदालत ने क्या कहा था?
इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और उसे अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचना चाहिए।
अदालत ने मामले के राजनीतिकरण को लेकर भी टिप्पणी की थी और कहा था कि अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि पहले दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए सीलबंद लिफाफे में जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है।
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