69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, दोनों पक्षों से मांगे सुझाव

HIGHLIGHTS
- 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से सुझाव मांगे हैं।
- सहमति बनने पर कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत मामले का निपटारा कर सकता है।
- मामले में करीब 5000 उम्मीदवारों को लेकर पेंच बना हुआ है, जिन्हें पहले नौकरी का ऑफर दिया गया था लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया था।
उत्तर प्रदेश की 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से सुझाव मांगे हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों पक्ष किसी एक राय पर सहमत होते हैं तो संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अगली सुनवाई चार अगस्त मंगलवार को मामले का निपटारा किया जा सकता है।
वहीं, अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती है और मतभिन्नता रहती है तो सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ लंबित याचिकाओं पर मेरिट के आधार पर सुनवाई करेगा। यह बात न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने सहायक शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई के दौरान कही।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सभी पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया था और मामले को 28 जुलाई को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था। हालांकि, मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि उसे अभी सभी पक्षों की लिखित दलीलें प्राप्त नहीं हुई हैं। इसके लिए पक्षकारों को बुधवार तक का अतिरिक्त समय दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगे दोनों पक्षों से सुझाव
सुनवाई के दौरान आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे पहले भी अपनी बात रख चुके हैं और उनका अब भी यही कहना है कि जब प्रदेश सरकार के पास रिक्तियां मौजूद हैं तो उम्मीदवारों को समायोजित कर मामले का निपटारा कर दिया जाए।
उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल लिखित दलीलों में दिए गए विवरण और पिछली सुनवाइयों में पेश किए गए आंकड़ों का हवाला दिया। दूसरे पक्ष की ओर से भी कुछ दलीलें रखी गईं।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष अपने सुझाव दाखिल करें। अगर दोनों पक्ष एकमत होते हैं तो कोर्ट अगले मंगलवार को अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर मामले का निपटारा कर सकता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर वादी और प्रतिवादी पक्ष में सहमति नहीं बनती है तो मामले की सुनवाई गुण-दोष यानी मेरिट के आधार पर की जाएगी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को दी गई है चुनौती
इस मामले में अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने चयन सूची रद्द कर दी थी और आरक्षण नियमों के पालन के साथ तीन महीने के भीतर नई चयन सूची तैयार करने का आदेश उत्तर प्रदेश सरकार को दिया था।
इस आदेश को नौकरी ज्वाइन कर चुके अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, क्योंकि हाई कोर्ट के फैसले से उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में ही हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
पिछली दो सुनवाइयों से सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर नौकरी कर रहे लोगों को हटाए बिना आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को समायोजित कर दिया जाए तो मामले का समाधान हो सकता है या नहीं।
5000 उम्मीदवारों को लेकर बना हुआ है पेंच
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार से जानकारी मांगी थी। सरकार ने हलफनामा दाखिल कर बताया था कि वह 9000 और उम्मीदवारों को समायोजित कर सकती है।
हालांकि, करीब 5000 ऐसे उम्मीदवारों को लेकर मामला अटका हुआ है, जिन्हें पहली नियुक्ति के समय नौकरी का ऑफर दिया गया था, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया था।
आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों और कोर्ट की ओर से भी इन 5000 लोगों को दोबारा नौकरी का अवसर देने पर सवाल उठाए गए थे। उस समय उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया था कि ये उम्मीदवार मेरिट में ऊपर हैं, लेकिन अगर कोर्ट निर्देश देगा तो उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा।
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