नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। 5 जनवरी को कुछ छात्रों ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाए। यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट के 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं मिलने के बाद हुआ।
मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि विश्वविद्यालय में छात्रों ने अशोभनीय नारे लगाए और राष्ट्र विरोधी बातें कीं। उन्होंने कहा कि युवा देश के भविष्य की रीढ़ हैं और उनकी जिम्मेदारी है कि वे समाधान का हिस्सा बनें।
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जेएनयू प्रशासन की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 352 (शांति भंग करने का इरादा), 353(1) (सार्वजनिक उपद्रव को उकसाने वाले बयान) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज की है।
उपराष्ट्रपति का संदेश: बहस जरूरी, लेकिन समाधान भी आवश्यक
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि स्वस्थ लोकतंत्र में बहस, विचार-विमर्श और असहमति आवश्यक हैं, लेकिन इसका अंतिम उद्देश्य किसी निष्कर्ष तक पहुँचने और उसे लागू करने का होना चाहिए। उन्होंने स्नातक छात्रों से अपने ज्ञान और कौशल को राष्ट्र सेवा में लगाने की अपील की और स्वामी विवेकानंद के विचारों को याद करते हुए शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर चरित्र निर्माण और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित करने का सुझाव दिया।
राधाकृष्णन ने छात्रों से तीन मुख्य जिम्मेदारियों की ओर ध्यान आकर्षित किया:
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सत्य की खोज में बौद्धिक ईमानदारी
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सामाजिक समावेशन के माध्यम से असमानताओं को कम करना
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राष्ट्रीय विकास में सक्रिय योगदान
साथ ही, उन्होंने संवैधानिक मूल्यों और देश के सांस्कृतिक आदर्शों का पालन करने तथा माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करने का भी आग्रह किया।
जेएनयू की प्रगति और उपलब्धियाँ
कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने नौवें दीक्षांत समारोह में बताया कि विश्वविद्यालय ने ऐतिहासिक संकाय भर्ती पूरी कर समावेशी और पारदर्शी पदोन्नति सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि जेएनयू ने 70 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड जुटाया है और अब विश्वविद्यालय में 14 स्कूल, 9 विशेष केंद्र और कई अन्य कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं।
वर्तमान में विश्वविद्यालय में लगभग 9,100 छात्र पढ़ रहे हैं, और इस वर्ष प्रवेश के लिए 3,000 से अधिक उम्मीदवारों ने आवेदन किया। पंडित ने यह भी बताया कि जेएनयू 80 पीएचडी, 49 मास्टर, 13 स्नातक स्तर के कार्यक्रम, सात प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, तीन डिप्लोमा और एक पीजी डिप्लोमा चला रहा है।