चुनाव आयोग ने देशभर के सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को मतदाता सूची में दर्ज पतों की त्रुटियां दुरुस्त करने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग का कहना है कि कई मतदान केंद्रों की मतदाता सूचियों में एक ही तरह की गड़बड़ी देखने को मिल रही है, जहां असंबंधित मतदाताओं के नामों के साथ समान मकान नंबर दर्ज हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह समस्या विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के कारण उत्पन्न नहीं हुई है, क्योंकि गणना चरण के दौरान मतदाताओं के विवरण में कोई संशोधन नहीं किया गया। बल्कि यह विसंगति लंबे समय से चली आ रही है और वर्षों में बनी हुई सूची संरचना का परिणाम है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि पतों में समान मकान नंबर दर्ज होने के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश मकानों के आधिकारिक नंबर नहीं होते, जिसके चलते काल्पनिक नंबर दर्ज कर दिए जाते हैं। वहीं, शहरी इलाकों में भी कई बार मकान नंबर की जगह 0 या 00 लिख दिया जाता है, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है।
उन्होंने यह भी बताया कि मतदाता सूची के विभिन्न भागों को पर्याप्त और स्पष्ट अनुभागों में विभाजित न किया जाना भी इस समस्या की एक बड़ी वजह है। इस स्थिति को सुधारने के लिए सभी ईआरओ को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
आयोग का कहना है कि प्रत्येक मतदान केंद्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को स्पष्ट और पर्याप्त अनुभागों में बांटना जरूरी है। इससे न केवल मतदान पर्चियों के वितरण में सुविधा होगी, बल्कि अलग-अलग व्यक्तियों के पते एक जैसे दर्ज होने की समस्या भी काफी हद तक कम की जा सकेगी। बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को अपने-अपने क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की सावधानीपूर्वक जांच कर ऐसी त्रुटियों को ठीक कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बूथ विभाजन में अनियमितता पर सख्ती
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मेरठ के जिलाधिकारी और कैंट क्षेत्र के ईआरओ से बूथों के विभाजन को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने पूछा है कि एक ही अनुभाग के मतदाताओं को अलग-अलग भागों में क्यों दर्ज किया गया और नियमों के बावजूद ऐसा विभाजन किस आधार पर किया गया। इसके साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि भाग संख्या 10 में केवल एक ही अनुभाग क्यों बनाया गया।
आधार के बिना भी जोड़ा जा सकता है मोबाइल नंबर
चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि मतदाता पहचान पत्र के साथ मोबाइल नंबर जोड़ने के लिए आधार कार्ड होना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, आधार के बिना मोबाइल नंबर लिंक कराने के लिए फॉर्म-8 ऑफलाइन जमा करना होगा। ऑनलाइन माध्यम से कोई भी फॉर्म भरने की स्थिति में ई-सिग्नेचर जरूरी होगा, जिसके लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर अनिवार्य है। यानी ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाने पर आधार और उससे लिंक मोबाइल नंबर की आवश्यकता पड़ेगी।