मुंबई: बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों के नतीजे समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए नई चिंता का संकेत दे रहे हैं। पहली बार भाजपा और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन ने उद्धव ठाकरे गुट को करीब तीन दशक बाद बीएमसी की सत्ता से बाहर कर दिया है। वहीं इन चुनावों में असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली एआईएमआईएम ने सपा को पीछे छोड़ते हुए उल्लेखनीय बढ़त बनाई है।
एआईएमआईएम ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक अबू आजमी के प्रभाव वाले क्षेत्र मानखुर्द में जीत दर्ज की है, जिसे सपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इसे महाराष्ट्र की राजनीति में सपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
नगर निगम चुनावों में एआईएमआईएम का प्रभाव
राज्य के 29 नगर निगमों में से 13 के चुनाव परिणाम सामने आए हैं, जिनमें एआईएमआईएम के कुल 95 प्रत्याशी विजयी हुए हैं। पार्टी ने न सिर्फ राज्य के अन्य हिस्सों में, बल्कि मुंबई जैसे अहम शहरी केंद्र में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम चुनावों में एआईएमआईएम दूसरे स्थान पर रही।
बीएमसी में सपा को सीमित सफलता
बीएमसी चुनावों में एआईएमआईएम को जहां चार सीटों पर जीत मिली, वहीं समाजवादी पार्टी केवल एक सीट तक सिमट गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र में मुस्लिम मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग अब सपा की बजाय एआईएमआईएम की ओर आकर्षित होता दिख रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह रुझान जारी रहता है तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी एआईएमआईएम का प्रभाव बढ़ सकता है, खासकर मुस्लिम मतदाताओं के बीच।