मुजफ्फरनगर। मीरापुर विधानसभा क्षेत्र की मोरना सहकारी शुगर मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने के लिए यूपी सरकार से 261.91 करोड़ रुपये की मंजूरी मिलने के बाद हुई प्रेस वार्ता में अनपेक्षित नाटक देखने को मिला। रालोद विधायक मिथिलेश पाल होर्डिंग और बैनर पर अपनी तस्वीर न होने से नाराज हो गईं और मंच पर जाने से इनकार कर दिया।
बिजनौर से रालोद सांसद चंदन सिंह चौहान ने उन्हें मंच पर बुलाया, लेकिन वह नहीं गईं। स्थिति को संभालने के लिए कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार खुद मंच से नीचे आए और विधायक का हाथ पकड़कर उन्हें बैठाया। इस दौरान मंच पर कुर्सी दी गई, जिससे वार्ता शुरू हो सकी।
मीडिया से बातचीत के दौरान यह भी सामने आया कि विधायक ने सांसद और पूर्व नेताओं के चित्रों पर माल्यार्पण करने से भी इनकार कर दिया। बाद में पूर्व मंत्री योगराज सिंह के आग्रह पर ही उन्होंने अकेले माल्यार्पण किया।
मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, इस विवाद की जड़ “क्रेडिट की होड़” में थी। सांसद चंदन सिंह चौहान और विधायक मिथिलेश पाल दोनों ने सोशल मीडिया और पोस्टर-बैनर के जरिए परियोजना में अपनी भागीदारी दिखाने की कोशिश की, जिससे मंच पर असंतोष और स्पष्ट विरोध देखने को मिला।
विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना दोनों नेताओं के बीच समन्वय की कमी को उजागर करती है। चंदन सिंह चौहान पहले मीरापुर से विधायक थे और बाद में बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद बने। इसके बाद मीरापुर सीट पर मिथिलेश पाल को टिकट मिला और जीत भी हासिल हुई। दोनों नेताओं के बीच यह राजनीतिक तालमेल न बनने का कारण अब सार्वजनिक रूप से दिखाई दिया।
इस पूरी घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि शुगर मिल परियोजना जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और राजनीतिक “क्रेडिट” की लड़ाई मंच पर असमंजस पैदा कर सकती है।