मुजफ्फरनगर: बालिका के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी को 20 साल की कड़ी सजा और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अभियुक्त ने पीड़िता को घर से बहला-फुसलाकर बाइक पर बैठाकर ले जाया था। इस केस में अभियोजन ने आठ गवाहों को पेश किया, जबकि पुलिस की विवेचना और गवाहों की रिपोर्ट ने मामले को साबित करने में अहम भूमिका निभाई।
डीजीसी राजीव शर्मा, एडीजीसी दीपक गौतम और एडीजीजी विक्रांत राठी के अनुसार, तितावी थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले व्यक्ति ने वर्ष 2021 में शिकायत दर्ज कराई थी कि रात को वह अपने घर में सो रहा था, जबकि पत्नी और बच्चे भी सो रहे थे। उसी दौरान आरोपी सुमित पुत्र करण सिंह ने उसकी नाबालिग बेटी का अपहरण कर बाइक पर ले लिया।
पूरे इलाके में तलाश के बाद भी पीड़िता का सुराग नहीं मिला। पुलिस ने मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की और बाद में किशोरी को सुरक्षित बरामद किया। इसके बाद अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया गया। पिछले पांच वर्षों से इस मामले की सुनवाई चल रही थी।
मंगलवार को विशेष अपर और जिला सत्र न्यायाधीश पोक्सो एक्ट कोर्ट की न्यायाधीश अलका भारती की अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें सुमित को अपहरण और दुष्कर्म समेत पोक्सो एक्ट की धाराओं में दोषी ठहराते हुए 20 साल की सश्रम कैद और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
साथ ही, छेड़छाड़ के एक अन्य आरोपी अरविंद शर्मा की अग्रिम जमानत याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता आशीष कुमार त्यागी ने बताया कि आरोपी ने 23 जून, पिछले वर्ष, चरथावल के एक मोहल्ले में गाड़ी हटाने को लेकर पीड़िता और उसकी बहन के साथ मारपीट की थी और अश्लील छेड़छाड़ की थी। अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।