त्रिपुरा के माछीमार गांव में एंजेल चकमा की असामयिक मौत ने परिवार और गांववालों को गहरे दुख में डाल दिया है। बेहतर शिक्षा और रोजगार की तलाश में देहरादून गया एंजेल अब कभी अपने गांव लौटकर नहीं आएगा। शुक्रवार को पूर्व सांसद तरुण विजय ने एंजेल के परिवार से मिलकर उन्हें सांत्वना दी।
एंजेल के पिता ने पूर्व सांसद से कहा कि वे अपने बेटे के लिए न्याय चाहते हैं, आर्थिक मदद नहीं। पूर्व सांसद ने बताया कि यह गांव बांग्लादेश सीमा के पास स्थित है और यहां सीमित शैक्षणिक अवसर होने के कारण युवा दूसरे राज्यों की ओर रुख करते हैं। एंजेल की मौत से पूरा गांव स्तब्ध है। घर में मातम का माहौल है, पिता, भाई और दादा सात दिवसीय बौद्ध पूजा में शामिल हैं, जबकि मां अंतिम संस्कार और कर्मकांड में व्यस्त हैं।
एंजेल ने अपने परिवार से कहा था कि उसे एक लाख रुपये मासिक वेतन वाली नौकरी मिल गई है और जल्द ही वह देहरादून जाएगा। पिता के साथ बातचीत के दौरान माहौल भावुक हो गया। तरुण विजय ने परिवार को भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड और त्रिपुरा की सरकारें इस मामले में लगातार संपर्क में हैं।
परिजनों ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि एंजेल से विवाद करने वाले मकान मालिक की भूमिका की उचित जांच नहीं हो रही है। उन्होंने जांच का दायरा बढ़ाने और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की। पूर्व सांसद ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तर पूर्वांचल एक हैं और इस जघन्य अपराध को राजनीतिक रंग देने का प्रयास करने वालों की निंदा करनी चाहिए।