उत्तराखंड के देहरादून में एक आदिवासी छात्र अंजेल चकमा की मौत नस्लीय टिप्पणियों के बाद हुई हमले का परिणाम रही। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, छात्र की मौत मस्तिष्क में गंभीर रक्तस्राव (ब्रेन ब्लीडिंग) के कारण हुई थी।

घटना 9 दिसंबर की शाम सेलाकुई इलाके में हुई, जब अंजेल अपने छोटे भाई माइकल के साथ किराने का सामान लेने बाहर गए थे। इस दौरान शराब के नशे में धुत्त कुछ लोगों ने दोनों भाइयों पर नस्लीय टिप्पणियां की। जब अंजेल और माइकल ने विरोध किया, तो हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। अंजेल को गर्दन और पेट में चाकू मारने के अलावा सिर और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। रिपोर्ट में बताया गया कि रीढ़ की हड्डी को भी गंभीर नुकसान हुआ था, जिससे शरीर के दाहिने हिस्से की गति बंद हो गई थी।

मुख्य आरोपी सूरज खवास (22) और उसके पांच साथी 9 दिसंबर को सेलाकुई मार्केट से गिरफ्तार किए गए। सूरज मणिपुर का रहने वाला है और फिलहाल देहरादून में रह रहा था। पांचों आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का अनुमान है कि एक और आरोपी नेपाल भाग गया है, जिसे पकड़ने के प्रयास जारी हैं।

अंजेल के पिता तरुण चकमा, जो सीमा सुरक्षा बल (BSF) में तैनात हैं, ने बताया कि हमलावरों ने उनके बेटे को ‘चीनी’ कहकर अपमानित किया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीड़ित के पिता से बात कर दुख जताया और घटना में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।