बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तेज दबाव में नजर आया और शुरुआती कारोबार में अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में सतर्क माहौल और डॉलर की बढ़ती मांग के चलते रुपया 31 पैसे गिरकर 91.28 प्रति डॉलर पर आ गया।

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 91.05 पर खुला और कुछ ही समय में 91.28 तक फिसल गया। इससे पहले मंगलवार को भी यह 7 पैसे की गिरावट के साथ 90.97 पर बंद हुआ था, जो उस दिन का रिकॉर्ड निचला स्तर था।

क्यों बढ़ा दबाव?

फॉरेक्स बाजार के जानकारों के मुताबिक, दुनिया भर में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिका से मिल रहे सख्त व्यापार संकेतों ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है। इससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है।

सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पबारी ने कहा कि अमेरिका में दोबारा व्यापार युद्ध की चर्चाएं और ग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी से वैश्विक बाजार पहले से ही अस्थिर हैं। साथ ही, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इससे निवेशक जोखिम और आगे की दिशा दोनों को लेकर असमंजस में हैं।

उनके अनुसार, यदि रुपया 91.07 के ऊपर लगातार कमजोर बना रहता है, तो अगला स्तर 91.70 से 92.00 के बीच आ सकता है, जब तक कि भारतीय रिजर्व बैंक बाजार में हस्तक्षेप न करे। वहीं, किसी भी सुधार की स्थिति में 90.30 से 90.50 का दायरा पहला मजबूत समर्थन बन सकता है।

पहले भी बना था रिकॉर्ड

16 दिसंबर 2025 को रुपया 91.14 के अपने पुराने अंतर-दिवसीय निचले स्तर और 90.93 के सबसे कमजोर समापन स्तर पर पहुंच चुका है।

इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दिखाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.05 प्रतिशत फिसलकर 98.59 पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 1.11 प्रतिशत गिरकर 64.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

शेयर बाजार पर भी असर

घरेलू शेयर बाजार में भी शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 385.82 अंक टूटकर 81,794.65 पर आ गया, जबकि निफ्टी 91.50 अंक गिरकर 25,141 पर कारोबार करता नजर आया।

एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 2,938.33 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की।