राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी का दावा, ‘मुर्मू ने वोट चोरी की बात खारिज नहीं की’

HIGHLIGHTS
- विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
- प्रतिनिधिमंडल में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और उमर अब्दुल्ला समेत कई नेता शामिल रहे।
- विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दे उठाए गए। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर कथित वोट चोरी के आरोपों पर अपनी बात रखी।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा, "पूरा देश जानता है कि वोट चोरी हो रही है। नरेंद्र मोदी इसके मुख्य सूत्रधार हैं, जबकि अमित शाह और ज्ञानेश कुमार इसे अंजाम दे रहे हैं। आज भारत की राष्ट्रपति ने इस तथ्य को खारिज नहीं किया।" राहुल गांधी ने बताया कि 12 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेआई सूर्यकांत को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
इससे पहले संसद भवन से राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च निकाल रहे इंडिया गठबंधन के सांसदों को पुलिस ने विजय चौक पर रोक दिया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम पहले ही राष्ट्रपति भवन भेजे जा चुके थे। विपक्षी नेता कथित वोट चोरी के मुद्दे पर राष्ट्रपति को ज्ञापन देने पहुंचे थे।
राष्ट्रपति मुर्मू से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल था?
खरगे, राहुल गांधी और ममता बनर्जी के अलावा प्रतिनिधिमंडल में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा, वीसीके प्रमुख थोल. थिरुमावलवन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर, माकपा महासचिव एमए बेबी और भाकपा के डी राजा शामिल थे।
मतदाता सूची के एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी सांसदों ने शुक्रवार रात राष्ट्रपति भवन की ओर 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च निकाला। इससे पहले इंडिया गठबंधन के सांसद संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में एकत्र हुए। यहां कथित वोट चोरी के खिलाफ आंदोलन आगे बढ़ाने और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग पर रणनीति को लेकर चर्चा की गई।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद खरगे ने क्या कहा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि गठबंधन के सहयोगी दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा और वोट चोरी के खिलाफ चार दिन पहले शुरू किए गए आंदोलन के बारे में जानकारी दी।
खरगे ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के सामने अपनी बात विस्तार से रखी। उन्होंने कथित वोट चोरी और ज्ञानेश कुमार की ओर से की गई गंभीर गलती का मुद्दा उठाया। खरगे के मुताबिक, विपक्ष ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी की।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने वोट चोरी की घटनाओं से जुड़े सबूत मांगे हैं। विपक्षी दल फिलहाल इन सबूतों को जुटा रहे हैं और उन्हें राष्ट्रपति को सौंपेंगे। खरगे ने कहा कि अन्य प्रासंगिक जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह देश के लोकतंत्र को नष्ट करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने उनकी बातें ध्यान से सुनीं और कहा कि वह मामले की गहराई से जांच करेंगी, संबंधित पक्षों से चर्चा करेंगी और उचित कदम उठाने पर निर्णय लेंगी।
ममता बनर्जी ने मुलाकात को सकारात्मक बताया
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि विपक्षी नेताओं ने ज्ञापन सौंप दिया है और इस मुलाकात को सकारात्मक रूप में देखा है। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ने मामले की जांच करने और पूरे विवरण को देखने की बात कही है। इसके लिए सबूतों की जरूरत होगी, जिन्हें उपलब्ध कराने पर विपक्ष ने सहमति जताई है।
ममता बनर्जी ने कहा कि पूरा देश इस मुद्दे को लेकर चिंतित है। उन्होंने राष्ट्रपति से संविधान के संरक्षक के रूप में इस मामले पर उचित ध्यान देने की अपील की, ताकि देश में लोकतंत्र कायम रहे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का रुख सकारात्मक था और उन्होंने मामले की जांच करने की बात कही।
विजय चौक पर रोके गए विपक्षी सांसद
राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च के दौरान इंडिया गठबंधन के कई सांसदों और नेताओं ने विजय चौक पर केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। सांसदों ने 'लोकतंत्र बचाओ' का बड़ा बैनर लेकर संसद भवन से विजय चौक तक मार्च निकाला।
हालांकि, विजय चौक पर पहले से बैरिकेडिंग कर तैनात पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
विपक्ष ने आंदोलन जारी रखने की बात कही
विपक्षी नेताओं ने शुक्रवार को दिल्ली में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगाए जाने का आरोप लगाया। संसद पहुंचे कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष अपना आंदोलन जारी रखेगा। उन्होंने सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
वेणुगोपाल ने कहा, "हम जो भी कदम उठाने का फैसला करेंगे, उसके बारे में आपको बताएंगे। जैसा कि हमने कल कहा था, हम आंदोलन जारी रखेंगे। परसों तक हम अपने फैसले पर कायम रहेंगे।"
दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन और लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, "दिल्ली में अघोषित आपातकाल लागू है। सभी ट्रेनें और मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। सरकार पूरी तरह डरी हुई है।"
ज्ञानेश कुमार को मिला कानूनी संरक्षण रद्द करने की मांग
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि 10 सदस्य राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के लिए अंदर जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष का शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा और लक्ष्य हासिल होने तक आंदोलन नहीं रुकेगा।
खेड़ा के मुताबिक, विपक्ष की मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर पर रोक, मतदाता सूची से हटाए गए 13.8 करोड़ लोगों के नाम बहाल करना और बैलेट पेपर से चुनाव कराना शामिल है। उन्होंने संसद में पारित उस प्रावधान को भी रद्द करने की मांग की, जिसके तहत ज्ञानेश कुमार को आजीवन कानूनी संरक्षण दिया गया है।
ममता बनर्जी ने ट्रेनें रद्द होने पर जताई नाराजगी
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी संसद पहुंचीं। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता आपस में चर्चा करने के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे।
ममता बनर्जी ने कोलकाता से चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के रद्द होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ट्रेनों का रद्द होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे छात्रों तथा युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए कब मांगा गया था समय?
विपक्षी दल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर चुनाव आयोग और एसआईआर से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते थे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए पहला अनुरोध 2 अक्टूबर को भेजा गया था। विपक्ष ने 15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के लिए समय मांगा था। हालांकि, मीडिया रिपोर्टों में 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात का समय दिए जाने की बात सामने आई थी।
एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर क्यों है विवाद?
विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। इंडिया गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
तीन दिन से जारी है विपक्ष का प्रदर्शन
इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश के साथ तेज हुआ था। इस दौरान पुलिस ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया था।
अगले दिन भी विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन जारी रखा और जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद 8 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट पर धरना दिया।
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