आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने सपा से गठबंधन पर स्थिति की साफ, सीट बंटवारे की बताई टाइमलाइन

HIGHLIGHTS
- आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने कई मुद्दों पर बात की।
- उन्होंने कहा कि गठबंधन से जुड़े फैसले कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा।
- राहुल गांधी और अखिलेश यादव के लगातार संपर्क में होने की बात कही।
लखनऊ। विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर जारी चर्चाओं के बीच प्रदेश कांग्रेस की नई अध्यक्ष 52 वर्षीय आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा है कि सपा के साथ गठबंधन को लेकर कोई असमंजस नहीं है। सीटों के बंटवारे को लेकर भी दोनों दलों के बीच किसी तरह के टकराव की स्थिति नहीं है।
शुक्रवार रात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा के बाद लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित बंगले पर उन्हें बधाई देने वालों का सिलसिला जारी रहा। इसी दौरान दैनिक जागरण के उप राजनीतिक संपादक (उत्तर प्रदेश) अजय जायसवाल से बातचीत में मोना ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर बने इंडिया गठबंधन से जुड़े फैसले राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर नवरात्रि में ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
मोना ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी इंडिया गठबंधन सत्ताधारी भाजपा को बड़ा झटका देगा और इस बार भी सरकार बनाएगा।
मोना से बातचीत के प्रमुख अंश
वर्ष 1989 से प्रदेश की सत्ता से बाहर कांग्रेस के सामने क्या चुनौतियां हैं?
मोना ने कहा कि जिस तरह राहुल गांधी संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उसी तरह हर कार्यकर्ता को भी सड़क पर उतरकर काम करना होगा। जब तक कार्यकर्ता के भीतर 2027 में सरकार बनाने का विश्वास नहीं आएगा, तब तक उसकी पूरी ताकत सामने नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं में यही विश्वास पैदा करना है।
क्या पार्टी ने आपको अध्यक्ष बनाने में देर कर दी?
उन्होंने कहा कि समय भले ही कम है, लेकिन उनके अनुसार यही उचित समय है। कम समय में पूरी टीम के साथ अधिक काम करके बेहतर परिणाम देने का प्रयास किया जाएगा। संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की बात उन्होंने कही। उनका कहना था कि संगठन और काडर वही रहेगा, लेकिन परिणाम अलग होंगे।
सपा के साथ गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर कश्मकश की बात सामने आ रही है?
मोना ने कहा कि गठबंधन को लेकर कोई संशय नहीं है। इंडिया गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर बना है, इसलिए इससे संबंधित निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा। हालांकि, प्रदेश के कार्यकर्ताओं की भावनाओं का भी सम्मान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव की रोज बातचीत हो रही है और इसी महीने नवरात्रि में सीटों के बंटवारे की तस्वीर साफ हो जाएगी।
कितनी सीटों की उम्मीद है? 150 सीटों की चर्चा है।
इस पर मोना ने कहा कि उन्हें जिम्मेदारी मिले अभी एक दिन ही हुआ है और उनके पास फिलहाल ऐसा कोई इनपुट नहीं है। इसलिए वह ऐसी कोई बात नहीं कहेंगी जिसकी पुष्टि वह नहीं कर सकतीं। चुनाव में किसे कहां से मैदान में उतारना है, इसका फैसला पूरी गंभीरता के साथ किया जाएगा।
भाजपा सरकार की उपलब्धियों पर आपका क्या कहना है?
मोना ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि देश का बिखराव है। उनके अनुसार सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करके सरकारें बनती रही हैं। उन्होंने चंदा चोरी, चढ़ावा चोरी, वोट चोरी, खाद चोरी, महिलाओं की असुरक्षा, भ्रष्टाचार और ध्वस्त कानून-व्यवस्था को उपलब्धियों के तौर पर गिनाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन्हीं मुद्दों को लेकर 2027 का चुनाव लड़ेगी।
आपके अध्यक्ष बनने से क्या महिलाओं को अधिक तवज्जो मिलेगी?
मोना ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा महिला सशक्तिकरण की थी, है और आगे भी रहेगी। उन्होंने वर्ष 2022 में प्रियंका गांधी के ‘लड़की हूं लड़ सकती हूं’ नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल नारा नहीं था। कांग्रेस ने 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देकर उनकी राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित की थी और आगे भी इस पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने भाजपा और उसके सहयोगियों से सवाल किया कि क्या वे विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकट देंगे।
संगठन के साथ चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी के बीच क्या आप खुद भी चुनाव मैदान में उतरेंगी?
मोना ने कहा कि वह रामपुर खास सीट से ही दोबारा चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि उनके पिता प्रमोद तिवारी नौ बार विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में राज्यसभा सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने भी कई चुनाव लड़े हैं और जीते हैं। मोना ने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके परिवार की चौथी पीढ़ी कांग्रेस में है। उन्होंने कहा कि वह अपनी आने वाली पीढ़ियों से भी कांग्रेस की सेवा और देश की सेवा करने के लिए कहेंगी।
प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति के लिए संगठन जिम्मेदार है या रणनीति?
मोना ने कहा कि इसके लिए किसी की गलती नहीं है। उनके मुताबिक दो-चार जिलों तक प्रभाव रखने वाले जाति और धर्म आधारित क्षेत्रीय दल बनने से कहीं न कहीं कांग्रेस का मूल वोट बंटा। उन्होंने माना कि इसके डैमेज कंट्रोल के लिए कांग्रेस ने सक्रियता नहीं दिखाई। हालांकि, उनका कहना है कि अब प्रदेश के लोग जाति और धर्म की राजनीति से ऊब चुके हैं।
क्या कांग्रेस सपा पर निर्भर होती जा रही है?
मोना ने इससे इनकार करते हुए कहा कि कांग्रेस किसी पर निर्भर नहीं है। उनके अनुसार गठबंधन की राजनीति आपसी सामंजस्य से चलती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में अच्छे परिणाम सामंजस्य बेहतर होने के कारण आए और अब उनकी जिम्मेदारी है कि यही सामंजस्य और समन्वय आगे भी बेहतर बना रहे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 से 2022 तक प्रियंका गांधी ने काफी काम किया। उसका अपेक्षित परिणाम 2022 के विधानसभा चुनाव में नहीं मिला, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में उसका असर देखने को मिला।
मोना ने कहा कि 400 पार का दावा करने वाली भाजपा इंडिया गठबंधन के कारण प्रदेश में आधे पर रह गई। उनके अनुसार कांग्रेस के काडर ने पूरी ताकत और ईमानदारी के साथ अपने प्रत्याशियों के साथ सपा प्रत्याशियों को भी जिताने का काम किया। उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी के काम से संगठन मजबूत हुआ है और पिछले ढाई वर्षों में भी काफी काम हुआ है, जिसका परिणाम 2027 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।
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