जंतर-मंतर धरने में शामिल होने पर गई नौकरी, असिस्टेंट प्रोफेसर ने डीएम से लगाई न्याय की गुहार

HIGHLIGHTS
- बरेली के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहित भारद्वाज ने सेवा समाप्ति को लेकर डीएम से शिकायत की।
- प्रोफेसर ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर धरने में शामिल होने के बाद बिना नोटिस कार्रवाई की गई।
- उन्होंने जांच पूरी होने तक सेवा समाप्ति आदेश रोकने और बहाली की मांग की है।
बरेली के गन्ना उत्पादक (स्नातकोत्तर) महाविद्यालय बहेड़ी के असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉमर्स) डॉ. मोहित भारद्वाज ने जिलाधिकारी को प्रार्थना-पत्र देकर सेवा समाप्त किए जाने के मामले में शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें बिना किसी कारण की जानकारी दिए, बिना नोटिस, बिना विभागीय जांच और बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के नौकरी से हटा दिया गया।
डॉ. मोहित भारद्वाज का आरोप है कि जंतर-मंतर पर धरने में शामिल होने के कारण उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सेवा बहाल करने की मांग की है।
प्रार्थना-पत्र में डॉ. भारद्वाज ने बताया कि उनकी नियुक्ति महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय की स्वीकृति के बाद 20 जून 2024 को हुई थी। उन्होंने 11 जुलाई 2024 को महाविद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया था। उनका कहना है कि कॉलेज की ओर से उन्हें पहचान पत्र जारी किया गया था, जिसकी वैधता 30 जून 2027 तक है।
उन्होंने यह भी बताया कि 20 मई 2026 को कॉलेज प्रशासन ने उनके उत्कृष्ट आचरण और कार्यनिष्ठा को प्रमाणित करते हुए चरित्र प्रमाणपत्र भी जारी किया था।
बिना नोटिस सेवा समाप्त करने का आरोप
डॉ. भारद्वाज ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद अचानक बिना किसी आरोप, बिना कारण बताओ नोटिस और बिना विभागीय जांच के उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। उन्होंने कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का भी मौका नहीं दिया गया।
उन्होंने इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों से संबंधित नियमावली के विपरीत बताया है।
पुलिस से बचकर दिल्ली गए थे प्रोफेसर
डॉ. मोहित भारद्वाज ने बताया कि वह जंतर-मंतर पर युवाओं के हक की लड़ाई में शामिल होने के लिए जा रहे थे। उनका आरोप है कि उन्हें घर पर नजरबंद करने की कोशिश की गई, जिसके बाद वह छत से कूदकर घर से बाहर निकले और धरने में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि धरने के दौरान छात्रों पर लाठियां बरसाई गईं। अगले दिन जब वह वापस लौटे तो प्रबंधक ने उन्हें निष्कासन पत्र दे दिया। उनका कहना है कि किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।
डॉ. भारद्वाज ने कहा कि उनके खिलाफ पहले कभी कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई और न ही किसी जांच में कोई आरोप साबित हुआ। उन्होंने बताया कि सेवा समाप्त होने से उन्हें और उनके परिवार को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सेवा समाप्ति आदेश पर रोक लगाने की मांग
डॉ. मोहित भारद्वाज ने जिलाधिकारी से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने जांच पूरी होने तक सेवा समाप्ति आदेश पर रोक लगाने, सेवा बहाल करने, बकाया वेतन और अन्य सेवा लाभ दिलाने की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री से भी न्याय दिलाने की अपील की है।
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